श्रीकरणपुर के दिव्यांग गायक विष्णु सागर ने पोलियो व हादसों के बावजूद जारी रखा संगीत का सफर, नामी गायकों के साथ दी है प्रस्तुति
श्रीकरणपुर. जीवन में कोई भी मुकाम हासिल करने के लिए हिम्मत, जज्बे व हौंसले की जरूरत होती है। यह बात वार्ड १२ निवासी दिव्यांग गायक विष्णु सागर पर सटीक बैठती है। दो वर्ष की उम्र में ही पोलियोग्रस्त होने व बाद में हुए दो सडक़ हादसों में गंभीर घायल होने के बावजूद बुलंद हौंसले व आत्मविश्वास के सहारे विष्णु ने जीवन का संगीत कभी रुकने नहीं दिया।
हिंदी, मारवाड़ी व पंजाबी गायकी में आवाज का लोहा मनवाने वाले सागर कई नामी-गिरामी गायकों के साथ प्रस्तुति दे चुके हैं। गायकी में कई पुरस्कार जीतने के बाद हाल ही में अपने इष्ट देव बाबा रामदेव के वशंजों की ओर से रामदेवरा में पुरस्कृत किए जाने पर विष्णु काफी प्रोत्साहित है।
पिता ने किया प्रेरित
एक साधारण परिवार में जन्मे छह भाईयों में विष्णु सबसे छोटा है। उससे छोटी उसकी दो बहनें भी हैं। विष्णु ने बताया कि दो वर्ष की उम्र में ही पोलियो होने पर उसके दोनों पैर घुटनों तक खराब हो गए। होश संभाला तो हाथों से ही पैरों का काम ? करना पड़ता था। उसकी ऐसी हालत देख जहां माता-पिता का मन दुखी होता वहीं दूसरे भाई बहन भी मन मसोस कर रह जाते। विष्णु का कहना है कि ६ वर्ष की उम्र में वह स्कूल गया लेकिन घर के कमजोर आर्थिक हालात व गीत संगीत का शौक के चलते आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी।
पिता भोलूराम नायक मजदूरी करते थे। निशक्त बेटे की गायन क्षेत्र में रूचि देख उन्होंने उसे आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। और पंडित कस्तूरीलाल शर्मा से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेकर धार्मिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देनी शुरू की। इस दौरान वर्ष २००० में उनके पिता की मौत हो गई। लेकिन पिता का सपना साकार करना विष्णु का मकसद बन गया।
हौंसले से भरी उड़ान
पोलियो व बाद में कई हादसे होने के बावजूद विष्णु ने हार नहीं मानी। इस अंदाज आप इस बात से लगा सकते हैं कि अक्टूबर २००४ में वे एक जागरण में प्रस्तुति देने एक निजी वाहन में भादरा जा रहे थे कि श्रीगंगानगर के बाहर निकलते ही सडक़ हादसा हुआ। और इसमें विष्णु का मुंह का जबड़ा हिल गया। बीकानेर के पीबीएम हस्पताल में लंबे समय तक चले इलाज के बाद वह फिर से गाने लायक हुआ। तो २०१२ में बीकानेर के निकट हुए सडक़ हादसे में उनकी बांई बाजू टूट गई। इससे काफी समय तक परेशानी झेलनी पड़ी।
उनका यह हाथ आज भी पूरी तरह से काम नहीं करता है लेकिन वे अपना कार्य बखूबी करते हैं। अब तक निकाले १७ एलबम विष्णु ने २०१३ में पहली वीडियो व आडियो कैसेट निकाली जो काफी लोकप्रिय हुई। अब तक उनके करीब १७ धार्मिक एलबम बाजार में आ चुके हैं। आगामी माह में श्याम बाबा के भजनों की कैसेट रिलीज होने वाली है। विष्णु ने बताया कि वर्ष २००६ में उन्हें सूफी गायक पूर्णचंद वडाली से सुर सीखने का मौका मिला। साथ ही कोलकाता में हो रहे एक विशाल जागरण में प्रस्तुति देने का न्योता मिला।
जहां वे हर वर्ष प्रस्तुति दे रहे हैं। उनके भजन आकाशवाणी सूरतगढ़ भी प्रसारित होते रहते हैं। वर्ष २०१० में मां कणकेश्वरी देवी गरबा महोत्सव इंदौर में होने वाले संगीत कार्यक्रम में दलेर मेहंदी व २०११ में कैलाश खेर के साथ गायन का अवसर मिला। वहां राजस्थानी मांड गायकी सुनाने पर विष्णु की काफी सराहना हुई। विष्णु बताते हैं कि गजल सम्राट गुलाम अली व सूफी गायक हंसराज हंस से भी उनकी मुलाकात हो चुकी है। उन्हीं की प्रेरणा से अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सूफी गायन शैली की कैसेट निकालने का सपना संजोए हैं।