श्री गंगानगर

‘जो मांगै ठाकुर अपने ते सोई-सोई देवै…

ज्ञान ही मनुष्य की गति का आधार है। ज्ञान हमारे जीवन को गति प्रदान करता है। यह वही सच्ची गति है, जिससे बौद्धिक व मानसिक विकास होता
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Updated: 27 Feb 2018, 7:22 AM IST
Gurudwara sahib

श्रीगंगानगर.

लंबे-चौड़े पंडाल में गूंजती गुरुओं की महिमा और श्रद्धा के रंग में रंगी संगत। गूंजते जयकारे। मौका था सोमवार को गुरु मान्यो ग्रंथ चेतना समागम के अंतिम दिन शबद गायन कार्यक्रम का। बाबा रणजीत सिंह ढिडरियां वालों ने 'मैं बजारन राम की' शबद गायन से कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि ज्ञान गायन, सुनने व समझने का विषय है। ज्ञान ही मनुष्य की गति का आधार है। ज्ञान हमारे जीवन को गति प्रदान करता है। यह वही सच्ची गति है, जिससे बौद्धिक व मानसिक विकास होता है।

'जो मांगै ठाकुर अपने ते सोई-सोई देवै नानक दास मुख ते जो बोलै इहां उहां सच्च होवे' शबद गायन करते हुए बताया कि परमात्मा की कृपा अपरमंपार है। यह हम पर निर्भर है कि हम कौनसी कृपा प्राप्त करने के इच्छुक हैं। यदि नाकारात्मक सोच रखते हैं, ईष्या रखते हैं तो वैसी ही कृपा प्राप्त होती है। जैसी सोची होगी वैसी कला ही हमारे जीवन में हावी हो जाती है। 'साहिब मेरा नित नवां सदा-सदा दातारÓ शब्द का तात्पर्य समझाते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा की बनाई सृष्टि अपरमंपार है। इसका कोई अंत नहीं। यह ज्ञान का ही कमाल है कि हर पल कोई न कोई नई तकनीक विकसित होती जा रही है।

इसलिए हमें अपने दिमाग को ज्ञान से सींचना होगा। हमारे देश में धर्म का बोलबाला होने के कारण हमारे गुरुओं ने हमें शबद ज्ञान के साथ जोड़ा। असली खजाना जो गुरुबाणी की चाबी से मिलता है। पाखण्डवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सिख धर्म में पाखण्ड का कोई स्थान नहीं है। हमें ज्ञान रुपी गुरु के बताए रास्ते पर चलते हुए पूरी दुनिया का ज्ञान लेना है जिसका माध्यम श्री गुरु ग्रंथ साहिब हैं। परमात्मा के ज्ञान में सारी दुनिया का ज्ञान ही समाहित है।


इससे पहले खालसा कॉलेज व स्कूल की बच्चियों ने 'गुरु पुरे मेरी रख लईं' शबद से कार्यक्रम शुरू किया। इसके बाद बाबा उपकार सिंह 6 जी वालों ने 'छड्ड सिहांसन हर जी आए' व 'हउं वार वार हर जी आए' शब्द गायन किया। गुरुद्वारा परमेश्वर द्वार के जत्थे ने 'मोए निरगुण का कोए न राखै संता संग समावणा शबद गायन किया।


सैकड़ों ने किया अमृतपान
सोमवार शाम हुए अमृतपान कार्यक्रम में साढ़े तीन सौ से अधिक महिला, पुरुषों व बच्चों ने अमृतपान किया। बाबा रणजीतसिंह ढिडरियां वालों ने कहा जो संगत आज अमृतपान कर गुरु वाली बनी है, वे औरों को प्रेरित करें। अमृतपान करने वाले जब पंडाल में पहुंचे तो उनका बोले सो निहाल के जयकारों व 'आओ खालसा जी जी आयां नूंÓ शबद से समस्त संगतों ने स्वागत किया। शाम 4 बजे शुरू हुआ अमृतपान का कार्यक्रम रात 9 बजे तक चला।


कन्या विद्यालय की नींव रखी
श्रीगुरूनानक खालसा कन्या पब्लिक विद्यालय अंग्रेजी माध्यम की नींव पांच प्यारों ने रखी। इस अवसर पर बाबा रणजीत सिंह ढिडरियां वाले भी उपस्थित थे। प्रबन्धन समिति के सदस्यों ने कहा कि इस विद्यालय में जरूरतमंदों की शिक्षा के लिए भी इलाके की संगतों के सहयोग से अलग से व्यवस्था की जाएगी।


...तो बाबा सबसे ज्यादा डिग्रियां ले लेते
बच्चों को पढ़ाई के बारे में समझाते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई कभी पूजा से नहीं आती। आपको पढऩा होगा। यदि कोई कहता है कि मात्था टेकने से, पूजा से पास हुआ जा सकता है तो आजकल के बाबा तो सबसे ज्यादा डिग्रियां ले लेते।


संगत की सेवा काबिले तारीफ
कार्यक्रम के दौरान गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। जिले के दूरदराज के गांवों से आई संगत की सेवा काबिले तारीफ थी। किसी ने लंगर तैयार करने की व्यवस्था संभाली तो किसी ने बर्तन साफ करने की। गांव तीन सीसी के गुरुद्वारा सिंह सभा के सेवादारों ने चाय के लंगर की व्यवस्था संभाल रखी थी।

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