
श्रीगंगानगर.
शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालन के लिए नगरपरिषद की ओर से लाखों रुपए रुपए खर्च लगवाई गई ट्रैफिक लाइटें को फिर चालू कराने के लिए सालभर मशक्कत चलती रही। लेकिन, साल निकल गया और लाइटें आज तक नहीं ऑन नहीं हो पाई।
नगर परिषद की ओर से दिल्ली की एक कंपनी को ठेका देकर ट्रैफिक लाइटें लगवाई गई थी, जो काफी पहले बंद हो गई थीं। कुछ माह पहले नगर परिषद ने इस कंपनी कर्मचारियों को पत्र भेजकर ट्रैफिक लाइटें शुरू करने के लिए कहा था।इस पर कंपनी ने शहर के विभिन्न चौराहों पर ट्रेफिक लाइट तो चालू कर दी लेकिन उनका समय निर्धारण सही नहीं कर पाए। इस दौरान वाहन लालबत्ती होने के बाद भी निकलते रहे। फिर से नगरपरिषद ने कंपनी कर्मचारियों को अवगत कराया लेकिन वे लाइटों को सही करने के लिए नहीं आए। यह मामला कलक्ट्रेट में होने वाली बैठकों में उठता रहा। कंपनी की ओर से कई बार ट्रैफिक लाइटों को चालू करने का प्रयास किया गया। कंपनी की ओर से लाइटें तो चालू कर दी गई लेकिन उनका समय निर्धारण सही तरीक से नहीं हो पाया। इसके चलते ट्रैफिक लाइटों का सिस्टम सही नहीं हो पाया।
आयुक्त ने कराई थी रिपोर्ट दर्ज
ट्रैफिक लाइटों को सही नहीं करने पर नगरपरिषद आयुक्त ने कोतवाली में कंपनी की ओर से लाइटों का ठेका लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इस कार्रवाई के बाद हरकत में आए कंपनी के लोगों ने नगरपरिषद को जल्द ही लाइटों को शुरू करने का भरोसा दिलाया। इस पर शहर में मुख्य-मुख्य दस स्थान चिह्नित किए गए थे। अक्टूबर में दिपावली से पहले कंपनी के लोगों ने बीरबल चौक पर ट्रेफिक लाइटें चालू कर दी है। वहीं दिपावली पर छह पाइंटों पर लाइटें चालू करने का आश्वासन दिया था लेकिन दिपावली भी निकल गई और साल भी गुजर गया लेकिन ट्रैफिक लाइटें सही नहीं हो पाई।
इनका कहना है
- ट्रैफिक लाइटों का समय सही निर्धारण नहीं होने के कारण यातायात व्यवस्था में बाधा आती है। इसलिए लाइटें बंद पड़ी हुई है। नगरपरिषद की ओर से काफी प्रयास किए गए लेकिन अभी तक बात नहीं बनी है।
- सुशील कुमार, प्रभारी यातायात शाखा श्रीगंगानगर।