UGC New Rules Protest: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध तेज है, दिल्ली में मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
UGC New Rules Protest: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन हो रहा है। देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूपी के कई हिस्सों में जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। फिलहाल विरोध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। वहीं, आज दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर छात्रों के द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किया गया। UGC ने नए नियमों के तहत ये 3 बड़े बदलाव किया है जिसको आप जान लीजिए।
नए नियमों में जातिगत भेदभाव की साफ और स्पष्ट परिभाषा तय की गई है। इसके तहत जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान या विकलांगता के आधार पर किया गया कोई भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार, जो पढ़ाई में समान अवसर में रुकावट बने या मानव गरिमा के खिलाफ हो, उसे जातीय भेदभाव माना जाएगा। इससे पहले जारी किए गए ड्राफ्ट में जातीय भेदभाव की ऐसी स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई थी।
नई परिभाषा में एससी/एसटी के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को भी शामिल किया गया है। नियमों के मुताबिक, OBC छात्रों के खिलाफ किया गया कोई भी अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यवहार अब जाति-आधारित भेदभाव की श्रेणी में आएगा। इससे पहले के ड्राफ्ट में OBC छात्रों को इस परिभाषा में शामिल नहीं किया गया था।
ड्राफ्ट नियमों में झूठी शिकायतों पर रोक लगाने के लिए सजा का प्रावधान रखा गया था, जिसमें जानबूझकर गलत या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने पर आर्थिक जुर्माना या कॉलेज से निलंबन तक की कार्रवाई का विकल्प था। हालांकि, अंतिम रूप से लागू किए गए नियमों में यह प्रावधान हटा दिया गया है।
आपको बता दें कि इन्हीं नियमों के बदलाव की वजह से सवर्ण वर्गोंं के छात्र विरोध कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि यह नियम एक भेदभाव वाला है, इससे विश्वविद्यालयों में अराकता उत्पन्न होगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र आलोकित त्रिपाठी ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि यह कानून कॉलेज परिसरों में हालात बिगाड़ सकता है और अव्यवस्था बढ़ने की आशंका है। उनके मुताबिक नए नियमों में सबूत पेश करने की जिम्मेदारी पूरी तरह आरोपी पर डाल दी गई है, जबकि गलत आरोप झेलने वाले छात्रों के लिए कोई ठोस सुरक्षा नहीं रखी गई है। त्रिपाठी ने इन प्रावधानों को दमनकारी बताते हुए कहा कि पीड़ित की परिभाषा पहले से तय मान ली गई है, जबकि परिसर में किसी भी पक्ष के साथ अन्याय हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित इक्विटी टीमें छात्रों को लगातार निगरानी में रहने जैसा अहसास कराएंगी और इसी कारण दिल्ली के अलग-अलग कॉलेजों के छात्र इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर सकते हैं।
यूजीसी का विरोध पूरे देश में हो रहाहै, हालांकि इसका असर सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। यहां बरेली में यूजीसी के नियमों से असहमति जताते हुए पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, इस नियम के विरोध में रायबरेली और लखनऊ में कुछ भाजपा नेताओं ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं। दूसरी ओर, छात्रों ने मंगलवार को यूजीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की थी, जिसे देखते हुए वहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।