
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बालिका पोटाकेबिन पोलमपल्ली की छात्राओं के अचानक बीमार पड़ने से हड़कंप मच गया है। पिछले दो दिनों में करीब 47 छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है। छात्राओं ने बुखार, उल्टी और दस्त की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। इनमें से कुछ छात्राओं को प्राथमिक उपचार के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर वापस पोटाकेबिन भेज दिया गया है। वहीं, 23 छात्राओं का अभी भी दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है। एक छात्रा की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे बेहतर उपचार के लिए सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद बीमार छात्राओं को दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है। इलाज के बाद कुछ छात्राओं की हालत में सुधार हुआ है और उन्हें वापस पोटाकेबिन भेज दिया गया है। फिलहाल 23 छात्राओं का स्वास्थ्य केंद्र में उपचार जारी है। वहीं, एक छात्रा को गंभीर हालत के चलते सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
बालिका पोटाकेबिन पोलमपल्ली में करीब 350 छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। एक के बाद एक छात्राओं के बीमार पड़ने से संस्थान की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर भोजन, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अभी तक छात्राओं के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि बीमारी का कारण दूषित भोजन, पानी, संक्रमण या कोई अन्य वजह है।
छात्राओं के लगातार बीमार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में बीमार छात्राओं का उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से छात्राओं की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही बीमारी के संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है, ताकि अन्य छात्राओं को संक्रमण या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से बचाया जा सके।
पोटाकेबिन में बड़ी संख्या में छात्राएं एक साथ रहती और पढ़ाई करती हैं। ऐसे में एक साथ कई छात्राओं के बीमार पड़ने के बाद बाकी छात्राओं के स्वास्थ्य को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता बीमार छात्राओं को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और बीमारी के कारणों का पता लगाना है। जांच के बाद ही छात्राओं के अचानक बीमार पड़ने की सही वजह स्पष्ट हो सकेगी।