
Rahul Gandhi Defamation Case: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ 2018 के आपराधिक मानहानि मामले में सुल्तानपुर की विशेष सांसद/विधायक अदालत आज फैसला सुनाएगी। राहुल गांधी फैसले के लिए अदालत में पेश हो रहे हैं। शिकायतकर्ता विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि पूरी सुनवाई हो चुकी है और अदालत ने फैसले के लिए आज की तारीख तय की थी। अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि यह मामला मई 2018 का है। आरोप है कि बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और उन्हें एक हत्या के मामले में आरोपी बताया था।
इससे नाराज होकर विजय मिश्रा ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। विजय मिश्रा उस समय स्थानीय जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष और जिले के भाजपा उपाध्यक्ष थे।
पांडेय ने बताया कि मामले को साबित करने के लिए अदालत में तीन गवाहों से पूछताछ की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आज फैसले की तारीख तय की। अधिवक्ता ने कहा कि फैसला सुनाए जाने के समय राहुल गांधी का व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना जरूरी है। उन्होंने बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 के तहत आरोपी को जमानत बांड और व्यक्तिगत मुचलका प्रस्तुत करना होगा।
पांडेय के ने कहा कि यदि राहुल गांधी बरी होते हैं तो शिकायतकर्ता के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प रहेगा। वहीं, यदि अदालत उन्हें दोषी पाती है तो आईपीसी की धारा 500 के तहत दो वर्ष तक के साधारण कारावास, जुर्माने या दोनों में से किसी एक का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सजा की अवधि, जुर्माने की राशि या बरी करने का निर्णय पूरी तरह अदालत के विवेक पर निर्भर है और फैसला प्रस्तुत किए गए कानूनी साक्ष्यों के आधार पर होगा।
राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का यह मामला साल 2018 का है। इसकी शुरुआत अमित शाह पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर हुई थी। इसके बाद शिकायत दर्ज होने से लेकर अदालत में गवाही, राहुल गांधी के बयान और अंतिम बहस तक कई चरण आए। आइए, साल-दर-साल समझते हैं कि इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ।
8 मई: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में चुनाव प्रचार के समय राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उस समय अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। वहीं, साल 2023 में अदालत ने राहुल गांधी को तलब किया
राहुल गांधी 20 फरवरी को अदालत में पेश हुए। इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई। बाद में शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान कराने की मांग की। 26 जुलाई को राहुल गांधी ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया और 9 अक्टूबर को शिकायतकर्ता विजय मिश्रा की गवाही दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता विजय मिश्रा की ओर से 28 फरवरी को गवाह अनिल मिश्रा की गवाही दर्ज की गई। 8 दिसंबर को शिकायतकर्ता के दूसरे गवाह रामचंद्र दुबे की गवाही दर्ज की गई।
20 फरवरी: मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के बजाय स्रोत में उल्लिखित सीआरपीसी की धारा 313 के तहत राहुल गांधी का बयान दर्ज किया गया। विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान कराने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की। 21 मई को मजिस्ट्रेट कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद विजय मिश्रा ने सेशन कोर्ट में इसे चुनौती दी। एडीजे कोर्ट ने 15 जुलाई को उनकी निगरानी अर्जी खारिज कर दी। 10 सितंबर को जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली अर्जी हाईकोर्ट में दाखिल की गई। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने इसे भी खारिज कर दिया।
12 अक्टूबर को केस की सुनवाई पूरी हुई। वहीं, 26 अक्टूबर को राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे करीब छह साल पुराने मानहानि मामले में सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत में फैसला सुनाया जाना है।