
Sultanpur Illegal Encroachment: राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने सोमवार को मंडी समिति, सुल्तानपुर का स्थलीय निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं, निर्माण कार्यों और मंडी परिसर में संचालित गतिविधियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई स्तरों पर कमियां सामने आने पर निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडी परिसर में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी भूमि पर किसी भी तरह के अवैध कब्जे को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान मंडी गेट पर आवश्यक बोर्ड स्थापित नहीं पाया गया। इस पर निदेशक ने नाराजगी जताते हुए उपनिदेशक निर्माण को तत्काल मंडी गेट पर उचित एवं प्रमुख स्थान पर बोर्ड लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडी परिसर की पहचान और वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए, जिससे मंडी में आने वाले किसान, व्यापारी और आमजन को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान मंडी परिसर में टटर आदि के माध्यम से किए गए अवैध कब्जे भी सामने आए। निदेशक ने इन कब्जों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सभी अवैध कब्जे 15 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडी परिसर सार्वजनिक उपयोग और कृषि उपज के व्यापार से जुड़ी गतिविधियों के लिए है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अनधिकृत कब्जा या अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जा सकता।
निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक मंडी परिसर से अवैध कब्जे पूरी तरह समाप्त होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक प्रभारी सचिव का वेतन आहरित न किया जाए। इस निर्देश को मंडी परिसर में अतिक्रमण को लेकर विभाग की गंभीरता और जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान मंडी परिसर में कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का भी निदेशक ने मौके पर परीक्षण किया। ई-नाम कार्यालय के दरवाजे के खराब गुणवत्ता वाले कब्जे पाए जाने पर उन्होंने संबंधित उपनिदेशक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी को गंभीर विषय बताते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा।
मंडी परिसर में सड़क निर्माण कार्य का भी निदेशक ने निरीक्षण किया। सड़क में विशेष रूप से सीसी ज्वाइंट के पास गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर उन्होंने पूरे कार्य की जांच कराने और आवश्यकतानुसार मरम्मत कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित दोषी या उत्तरदायी व्यक्ति का दायित्व निर्धारित किया जाए।
बरसात के दौरान मंडी परिसर में जलभराव की समस्या को लेकर भी निदेशक ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलभराव की समस्या का केवल अस्थायी समाधान करने के बजाय उसके स्थायी निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके लिए जल निकासी की व्यवस्था और परिसर की स्थिति का समुचित परीक्षण कर प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि मंडी में बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी प्रतिदिन आते हैं। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव होने से आवागमन के साथ-साथ कृषि उपज की आवाजाही भी प्रभावित होती है। इसलिए जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करना प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।
मंडी परिसर में जाम की स्थिति को लेकर भी निदेशक ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्य मार्ग पर अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था के कारण आवागमन बाधित नहीं होना चाहिए। इसके लिए व्यापारियों को पीछे की ओर व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए, ताकि मंडी के मुख्य मार्ग पर आवागमन सुचारु बना रहे। निदेशक ने अधिकारियों से कहा कि मंडी में आने वाले किसानों और व्यापारियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यातायात व्यवस्था में सुधार से न केवल मंडी परिसर में जाम की समस्या कम होगी, बल्कि कृषि उपज की लोडिंग और अनलोडिंग समेत अन्य गतिविधियां भी व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकेंगी।
निरीक्षण के अंत में निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक बिंदु पर निर्धारित समयावधि में वास्तविक कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के भीतर अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
सुल्तानपुर मंडी समिति के निरीक्षण के दौरान अवैध कब्जे, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जलभराव और यातायात व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। निदेशक की ओर से दिए गए कड़े निर्देशों के बाद अब संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो गई है। खासकर अवैध कब्जों को 15 दिनों में हटाने और इसके प्रमाण-पत्र तक प्रभारी सचिव का वेतन आहरित न किए जाने के निर्देश ने मामले की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया है।
मंडी समिति में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और किसानों-व्यापारियों को सुचारु सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अब विभागीय कार्रवाई पर नजर रहेगी। निर्धारित समयसीमा में अवैध कब्जे हटाने, निर्माण कार्यों में मिली कमियों को दूर करने, जलभराव का स्थायी समाधान करने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के बाद ही मंडी परिसर की व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार दिखाई देगा। निदेशक ने स्पष्ट किया है कि दिए गए निर्देशों के अनुपालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।