सुरजपुर

Raipur की टीम लौटी, अब Delhi की टीम कल से जानलेवा मच्छरों पर करेगी रिसर्च

मलेरिया वाहक घातक क्यूलिफेसिस वेक्टर पर करेंगे रिसर्च , 21 अगस्त को टीम दिल्ली की 2 सदस्यीय टीम पहुंचेगी सूरजपुर, एनआईएमआर की 4 सदस्यीय टीम लौटी
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malaria research team
Malaria research team

सूरजपुर. मलेरिया के भीषण प्रकोप वाले चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के ग्रामों में मलेरिया व मच्छरों पर रिसर्च कर रही नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ मलेरिया रिसर्च सेंटर रायपुर की 4 सदस्यीय टीम शुक्रवार को वापस लौट गई। इस टीम के वापस लौटने के बाद अब इस जानलेवा मलेरिया और मच्छरों की प्रजाति पर दिल्ली की 2 सदस्यीय टीम क्षेत्र में २ महीने तक रहकर सघन रिसर्च करेगी।


मलेरिया के भीषण प्रकोप और दिमागी मलेरिया को बढ़ावा देने वाले वेक्टर के रूप में नेशनल इंस्टीटयूट आफ मलेरिया रिसर्च सेंटर रायपुर की 4 सदस्यीय टीम को यहां क्यूलिफेसिस वेक्टर की जानकारी मिली थी। डॉ. राजू रांझा के नेतृत्व वाली टीम ने मलेरिया प्रभावित ग्राम महुली, खोहिर, कोल्हुआ, पासल, विशालपुर एवं अवंतिकापुर समेत अन्य ग्रामों में पहुंचकर मिट्टी, पानी और वनस्पतियों के साथ साथ मच्छरों की विभिन्न प्रजातियों का संग्रहण किया था।

रिसर्च टीम के प्रमुख डॉ. राजू रांझा को यहां जनित मच्छरों में क्यूलिफेसिस वेक्टर के लक्षण मिले थे, यह एक बड़ी सफलता है। क्यूलिफेसिस वेक्टर के लक्षण इससे पूर्व सूरजपुर जिला समेत प्रदेश के कई जिलों में नहीं पाये गये।


2 माह तक क्षेत्र में रिसर्च करेगी दिल्ली की टीम
एनआईएमआर रायपुर की टीम के लौट जाने के बाद मलेरिया प्रभावित ग्राम महुली, खोहिर, पासल, विशालपुर, उमझर, कोल्हुआ, बिहारपुर, कांतिपुर एवं अवंतिकापुर समेत आसपास के जंगलों एवं मैदानी भागों के विभिन्न पहलूओं पर अध्ययन के लिए दिल्ली की दो सदस्यीय टीम सूरजपुर 21 अगस्त को पहुंचेगी।

यह टीम यहां दो महीने तक रहेगी। क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों एवं पारा, टोला और मोहल्लों में पहुंचकर मच्छरों की प्रजाति, मलेरिया के प्रकार, मच्छरों के पनपने एवं मृत्यु के कारण, इलाज हेतु कारगर दवा, बचाव हेतु उपयुक्त उपाय, जरूरी सावधानियों के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण पहलूओं पर शोध करेंगे।


8 दिन के रिसर्च के बाद लौटी रायपुर की टीम
मलेरिया प्रभावित विभिन्न ग्रामों में मलेरिया व मच्छरों पर शोध करने के बाद लौटी नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ मलेरिया रिसर्च सेंटर रायपुर की चार सदस्यीय टीम के प्रमुख डॉ. राजू रांझा ने अपनी रिर्पोटिंग में बताया कि चांदनी बिहारपुर क्षेत्र मलेरिया और क्यूलिफेसिस वेक्टर के लिए प्राकृतिक रूप से अनुकूल है।

इस क्षेत्र में निवासरत वनवासियों एवं ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता में कमी है। वहीं फिल्डवर्करों में आत्मविश्वास की कमी है और उन्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता है। मच्छरों में मलेरिया वाहक क्यूलिफेसिस वेक्टर की अधिकता है।


खानपान और सफाई में सुधार की सलाह
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आरएस सिंह ने बताया कि रिसर्च के बाद वापस लौट रही टीम ने सलाह दी है कि कोल्हुआ, चांदनी क्षेत्र में व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर यहां की संस्कृति में सुधार लाने की आवश्यकता है। यहां निवासरत लोग साफ -सफाई को लेकर सजग नहीं है और न ही खानपान पर ध्यान देते हैं। दूषित जल और प्रदूषित भोजन भी यहां के लोगों की बीमारी का कारण है।

Published on:
20 Aug 2017 02:48 pm
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