
वलसाड. अगर आप या आपके बच्चे चॉकलेट खाने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाएं। चॉकलेट में कीड़े आपको बीमार भी बना सकते हैं। ऐसा ही एक मामला वलसाड के मोगरावाड़ी में सामने आया। यहां स्थित एक दुकान से खरीदे गए चॉकलेट में कीड़े निकले हैं।
क्षेत्र की शारदाधाम सोसायटी की एक दुकान से आसपास के कई बच्चे पांच रुपए वाली चॉकलेट खरीदकर घर ले गए थे। वहां चॉकलेट खोलने पर उसमें से कीड़े निकले। तीन - चार चॉकलेट से कीड़े निकलने पर वापस दुकानदार के पास ले जाकर चॉकलेट दिखाया। उसने गर्मी के कारण ऐसा होने का कारण बताते हुए चॉकलेट को फेंक कर अपना पल्ला झाड़ लिया। बाद में चॉकलेट का रैपर देखा तो वैधता की तारीख बीत चुकी थी। बाद में दुकानदार ने बच्चों को दूसरा चॉकलेट देखकर लौटा दिया। बच्चों के माता पिता ने कहा कि यदि चॉकलेट को बिना देखे खा लिया होता तो कीड़े पेट में चले जाते और बीमारी हो सकती थी।
साहब जो मिला, वही खाकर रह लिए
सिलवासा. लॉकडाउन से रोजगार चला गया और अब कुछ राहत मिली है तो रोजगार नहीं। छोटे-छोटे बच्चे हैं, उन्हें भूखे तो नहीं रख सकते न। लॉकडाउन खुलने की आस में इधर-उधर से जो मिल गया खाकर रह लिए साहब। यह कहना है महाराष्ट्र से सिलवासा में कचरा बीनने आई 30 वर्षीया शोभा और 28 वर्षीया कंगना का।
दोनों महिलाएं सामान्य दिनों में कचरा व भंगार एकत्र करके अपना परिवार चलाती थी, लॉकडाउन से उनका धंधा चला गया। शोभा ने बताया कि लॉकडाउन से तीन दिन पहले 22 मार्च को उसका पति गांव गया था, बाद में लॉकडाउन से वहीं फंसकर रह गया। अब घर में कुछ नहींं होने से खाने के लाले पड़ गए हैं। वह आमली की झुग्गी-झोपड़ी में रहती है। यहां शाम को अक्षयपात्र की गाड़ी से खिचड़ी मिलती हैं, लेकिन उसके आने का भरोसा नहीं है। पढ़े-लिखे नहीं होने से प्रशासन से खाना प्राप्त करने की विधि भी नहीं मालूम है। बस, आसपास के लोगों से मांगने पर जो मिल जाता है, खाकर काम चला लेते है। कई बार भूखे भी रहना पड़ जाता है। इन्हें लॉकडाउन खुलने का इंतजार है, ताकि अपने गांव जा सके। जिले में शोभा, कंगना जैसे कई परिवार हैं जो लोगों से भंगार, प्लास्टिक, टूटा-फूटा कचरा आदि एकत्र कर परिवार की गुजर-बसर करते हैं।