जनवरी-फरवरी से अभी भी अटका है 70 फीसद पैमेंट, नतीजा यह कि सूरत कपड़ा मंडी के कई छोटे व्यापारी स्विच ऑफ और स्विच ऑन तक हो गए
सूरत. उधारी में व्यापार के लिए पूरे देश में दो ही मंडियां खासी जानी-पहचानी है और उनमें से एक है कोलकाता तो दूसरी सूरत कपड़ा मंडी है, लेकिन इस बार कोरोना काल में यह उधार मंडी के हजारों व्यापारियों को काफी भारी पड़ गई नतीजन रोज के एक-दो पार्सल लगाने वाले कई व्यापारियों को तो सूरत कपड़ा मंडी से कारोबार स्विच ऑफ ही करना पड़ गया तो कईयों ने दूसरे कारोबार में स्विच ऑन भी कर लिया। बताई गई स्थिति की मानें तो बीतते वर्ष 2020 की शुरुआत वाले जनवरी-फरवरी में बेचे गए माल का पैमेंट अभी भी देशभर की निचली मंडियों में ही जाम पड़ा है जो कि सूरत कपड़ा मंडी के लिए किसी भी हाल में बेहतर नहीं गिना जा सकता। वर्ष की शुरुआत से बात की जाए तो सूरत कपड़ा मंडी की व्यापारिक धारणा के मुताबिक वर्ष 2019 के दीपावली सीजन पर हुई ग्राहकी का पैमेंट मार्च से शुरू होने वाली लग्नसरा ग्राहकी से रिलीज होता मगर इसी वर्ष मार्च में कोरोना महामारी का विकट आगमन हो गया और पैमेंट आना तो दूर बल्कि कारोबार बंद करने की नौबत आ गई। लम्बी अवधि के लॉकडाउन के बाद जून से ऑड-ईवन पद्धति से कपड़ा बाजार खुलने लगा और इसकी व्यापारिक गतिविधि सुचारू होने में जून-जुलाई भी यूं ही निकल गए, तब तक निचली मंडियों में कई जगहों पर बाजार खुलने और नहीं खुलने की स्थिति ही बनी हुई थी। अब जब अगस्त-सितम्बर से सूरत कपड़ा मंडी में लेवाली बढ़ी तो पुराना स्टॉक (लग्नसरा सीजन का संग्रहित माल) स्थानीय व्यापारियों ने पहले निकाला और यह सिलसिला दीपावली तक चला। इस दौरान 30 फीसद तक पुराना पैमेंट भी सूरत कपड़ा मंडी में पहुंचा, लेकिन बड़ा हिस्सा 70 फीसदी तो फिर भी निचली मंडियों में अटका ही रहा।
-75 फीसद व्यापार लग्नसरा कंसेप्ट
इस दीपावली पर प्रिंट माल ही अधिक बिका है और इसमें भी ज्यादातर व्यापारियों का स्टॉक क्लीयर हुआ है। सूरत कपड़ा मंडी का कपड़ा कारोबार बदला है और 75 फीसद लग्नसरा कंसेप्ट, केटलॉक और डाइड पर टिका है और इन सबमें क्रिएशन महत्वपूर्ण है। अब क्रिएशन के लिए बेहद आवश्यक है निचली मंडियों में लम्बे समय से अटका पैमेंट रिलीज हो।
-निजी निवेश से घुमाते हैं रोटेशन
पिछली बिक्री के माल का पैमेंट पाए बगैर ही सूरत कपड़ा मंडी के अधिकांश कपड़ा व्यापारी नई सीजन की तैयारियों में लग जाते हैं और इसमें वे थोक में ग्रे आयटम की खरीदारी, मिल में प्रोसेस, वेल्यू एडीशन वर्क समेत अन्य व्यापारिक गतिविधियों को पूरा करते हैं। यह सारा खर्चा वे निजी निवेश से करते हैं और इसमें बैंक सीसी का उपयोग सूरत कपड़ा मंडी में अधिक किया जाता है।
-पैमेंट रिलीज होना आवश्यक
कोरोनाकाल में कई तकलीफें भुगत चुकी सूरत कपड़ा मंडी के लिए अब आवश्यक हो गया है कि सालभर पुराना पैमेंट जल्द रिलीज हो। दूसरा निचली मंडियों को यहां का पैमेंट गर्म कपड़े की मंडियों में अटकाने की नीति से भी परहेज करना पड़ेगा।
दिलीप खूबचंदानी, आढ़तिया, सिल्क हेरीटेज मार्केट
सेल्फ इंवेस्ट की एक लिमिट
सूरत कपड़ा मंडी का व्यापारी बैंक सीसी, लोन आदि से कब तक कपड़ा कारोबार का रोटेशन घुमाता रहेगा। लम्बी उधार की व्यापारिक नीति के प्रति स्थानीय कपड़ा व्यापारी व सभी व्यापारिक संगठनों को ङ्क्षचतन के साथ आगे बढऩा होगा।
सचिन अग्रवाल, बोर्ड मेम्बर, साउथ गुजरात टैक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन।
कब तक झेंलेंगे नुकसान
सूरत कपड़ा मंडी में सबसे पहले और सर्वाधिक मजबूती के साथ पैमेंट कंडीशन की दिशा में टेंट-शामियाने के व्यापारियों ने की है और इसके सार्थक परिणाम भी निचली मंडियों से थोड़े ही दिनों में दिखाई देने लग गए हैं।
देव संचेती, अध्यक्ष, सूरत मंडप क्लॉथ एसोसिएशन।
-ट्रेडर्स के लिए कोई नियम-कानून नहीं
सूरत कपड़ा उद्योग की सशक्त जान हजारों ट्रेडर्स के लिए ही पैमेंट समय पर पाने के कोई ठोस नियम-कानून नहीं है। देश की अन्य मंडियों को छोड़ दें अब तो सूरत कपड़ा उद्योग में ही दूसरे घटक पैमेंट के मामले में कड़े नियम बना चुके हैं। सूरत कपड़ा मंडी के हजारों ट्रेडर्स के कहने को कई संगठन हैं मगर इनकी मजबूत पकड़ दशकों बाद भी अभी तक मंडी पर नहीं बन पाई है।
-यहां अटकता है सूरत कपड़ा मंडी का पैमेंट
निचली मंडियों में दीपावली सीजन की खरीदारी के बाद तत्काल ही विंटर सीजन शुरू हो जाता है और यहां के व्यापारियों को गर्म कपड़े खरीदने के लिए पानीपत, लुधियाना, दिल्ली, इरोड़, अहमदाबाद, कोलकाता आदि की मंडियों में नकद रकम चुकाकर माल उठाना पड़ता है। इन्हें देख गारमेंट मे तो टोकन सिस्टम तक आ गया है और शुटिंग-शर्टिंग वाले भी नकद कारोबार में यकीन करने लगे हैं।
-सूरत कपड़ा मंडी में दिखाई हिम्मत
कोरोना काल में उपजी सूरत कपड़ा मंडी की विषम परिस्थितियों को अपने ढंग से अनुकूल बनाने के लिए कड़े नियमों के तहत व्यापार की नीति फिलहाल हजारों ट्रेडर्स के मात्र 2-3 प्रतिशत कहे जा सकें ऐसे टेंट-शामियाने के व्यापारियों के संगठन सूरत मंडप क्लॉथ एसोसिएशन ने बनाई है। तय अवधि में पैमेंट के अलावा एसोसिएशन ने तो प्रति पार्सल एक सौ रुपए चार्ज भी बिल में जोडऩा शुरू कर दिया है।
-ओल्ड बट गुड व्यूज
आज से डेढ़ दशक पहले सूरत कपड़ा मंडी का पैमेंट सिस्टम ऐसा नहीं था बल्कि इसमें काफी टाइटनेस थी। सूरत कपड़ा मंडी के कपड़ा कारोबार में आढ़तिया/एजेंट्स की भूमिका वर्ष 2007-08 तक केवल माल बिकवाने तक सीमित नहीं थी बल्कि उसका पैमेंट तय अवधि में मंगवाने की भी बड़ी जिम्मेदारी थी। तय अवधि में पैमेंट नहीं आने पर आढ़तिया/एजेंट्स की दलाली-ब्रोकरेज में कटौती तक होती थी।