- विद्यार्थियों की गलती, सजा खुद को- विद्यार्थियों को सही राह पर लाने की अनोखी कोशिश- खुद ही कड़ी धूप में मैदान में हो जाते हैं खड़े, कक्षा में कर लेते हैं उठक-बैठक भी
सूरत.
अड़ाजन स्थित भुलका विहार स्कूल के गणित और फिजिक्स के शिक्षक विद्यार्थियों को सुधारने के लिए अनोखी पहल कर रहे हैं। विद्यार्थियों को उनकी गलती की सजा देने के बजाय खुद ही सजा भुगतते हैं। विद्यार्थी शिक्षक को सजा पाता देख अपनी गलती सुधार लेते हंै और आगे से ऐसी गलती कभी नहीं दोहराते हैं।
विद्यार्थी गलती करे तो शिक्षक उसे सजा देते हैं, ताकि विद्यार्थी दोबारा वह गलती नहीं करे। गलती करने से डरे, गलती हो रही हो तो सजा याद आ जाने पर तुरंत सुधार कर ले। कई बार शिक्षक की ओर से विद्यार्थी को पीटने का मामला भी प्रकाश में आता रहता है। नाराज अभिभावक स्कूल पहुंच जाते हैं। मामला विवादित बन जाता है। विद्यार्थी को सजा देने पर उसकी मानसिकता पर भी गहरा असर होता है। इसलिए सरकार ने भी विद्यार्थियों को मानसिक और शारीरिक सजा ना करने पर रोक लगा रखी है। विद्यार्थियों को सजा ना देकर खुद को ही सजा देकर उन्हें सुधारने की अनोखी पहल भूलका विहार के शिक्षक जयेश त्रिवेदी कर रहे हैं। जयेश पिछले 12 सालों से बतौर शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन पिछले 12 सालों में किसी भी विद्यार्थी को उन्होंने सजा नहीं दी है। उल्टा विद्यार्थियों की गलती होने पर खुद को ही दोषी मानकर खुद को ही सजा देते है। यह देख विद्यार्थी शर्मिंदा हो जाते हैं। आगे से गलती नहीं करने का शिक्षक से वादा भी करते हैं।
...ताकि विद्यार्थी शर्म महसूस करें
विद्यार्थियों से गलती होने पर जयेश स्कूल के मैदान में कड़ी धूप में खड़े हो जाते हैं। कभी वह कक्षा में एक जूता उतार कर विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। कभी कक्षा में विद्यार्थियों के सामने उठक-बैठक भी लगा लेते हैं। विद्यार्थियों को गलती का अहसास दिलाने के लिए वे कक्षा में लेबल लगाकर पढ़ाते हंै कि विद्यार्थी उनकी सुनते नहीं। यह देख विद्यार्थी शर्म से पानी-पानी हो जाते हैं। शिक्षक को सजा भुगतते देख विद्यार्थी तुरंत उनसे माफी मांगते हैं। शिक्षक से आगे से गलती नहीं करने का वादा भी करते हैं। विद्यार्थियों को सुधारने का उनका इस तरीके का स्कूल के अन्य शिक्षक और प्राचार्य भी समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि इस तरीके से स्कूल में अनुशासन बना रहता है।
- डर नही, प्रेम का सम्बंध होना चाहिए
शिक्षक जयेश का कहना है कि विद्यार्थी और शिक्षक के बीच प्रेम का संबंध होना चाहिए। विद्यार्थी शिक्षक से डरता रहेगा तो कक्षा में बुत बनकर बैठा रहेगा। शिक्षक से कड़ी सजा मिलने पर विद्यार्थी पर मानसिक और शारीरिक असर भी पड़ता है। शिक्षक खुद सजा भुगतेगा तो विद्यार्थी को मन में दु:ख होगा। शिक्षक से प्यार होने पर फिर कभी गलती नहीं दुहराने का विद्यार्थी भी ठान लेगा। यह तरीका कारगर साबित हुआ है।