सूरत

कंटेनर तो हटा लिए, कचरे के ढेर रह गए

बिगड़े सूरत मनपा के हाल : शहर का कचरा ठिकाने लगाने ने बढ़ाया सिरदर्द
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Nov 25, 2018
patrika
कंटेनर तो हटा लिए, कचरे के ढेर रह गए

रत. राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता की रैंकिंग में लगातार पिछड़ रही सूरत महानगर पालिका के लिए शहर का कचरा बड़ा सिरदर्द बन गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल खजोद की डिस्पोजल साइट बंद करने का आदेश दे चुका है, क्योंकि इस साइट से आस-पास के इलाकों की आबो-हवा बिगड़ रही थी। डिस्पोजल साइट को शहर से दूर भांडूत में शिफ्ट करने का काम फिलहाल शुरू नहीं हुआ है। उससे पहले मनपा ने शहर को कंटेनर मुक्त करने का अभियान छेड़ते हुए सभी कंटेनर (करीब 1,100) हटा दिए। कंटेनर हटाने के विरोध में कई इलाकों के लोगों ने सड़कों पर ही कचरा फेंकना शुरू कर दिया। इससे न सिर्फ स्वच्छता अभियान को झटका लगा है, शहर के कचरे को लेकर एक और संकट खड़ा हो गया है। मनपा कर्मचारियों ने शनिवार को अलथाण रोड की नहर में फैली गंदगी हटाई, लेकिन जगह-जगह लगे कचरे के ढेर और तापी नदी के किनारों पर फैली गंदगी की तरफ अब तक मनपा का ध्यान नहीं गया है।

सूरत में रोजाना करीब 1,650 मैट्रिक टन कचरा पैदा होता है। इस कचरे को ठिकाने लगाने की व्यवस्था एक दिन भी गड़बड़ाती है तो शहर में गंदगी के कैसे विकट हालात पैदा होते हैं, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इंदौर की तर्ज पर सूरत महानगर पालिका प्रशासन ने शहर को कंटेनर फ्री तो बना लिया, लेकिन रास्ते से कचरे के ढेर नहीं हट पाए। रास्तों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं और कचरा बिखर कर सड़कों पर फैल रहा है। कुछ लोग तो कचरे को ठिकाने लगाने का कोई विकल्प नहीं मिलने पर इसे प्लास्टिक की थैलियों में बंद कर केबल ब्रिज पर ही छोड़ गए। मनपा कर्मचारियों ने शनिवार को अलथाण रोड की नहर में फैली गंदगी हटाई, लेकिन जगह-जगह लगे कचरे के ढेर और तापी नदी के किनारों पर फैली गंदगी की तरफ अब तक मनपा का ध्यान नहीं गया है।

Published on:
25 Nov 2018 11:51 am