छत्तीसगढ़ के शिमला में हाथियों का उत्पात जारी है। 24 हाथियों का दल यहां पिछले 10 दिनों से आतंक मचाए हुए है। हाथी प्रतिदिन यहां के अलग-अलग इलाकों में ग्रामीणों को बेघर कर रहे हैं। वहीं ग्रामीण आशियाना छिन जाने के बाद दिन में खुले आसमान के नीचे तो रात में स्कूल में एकसाथ रहने विवश हैं।
इधर वन विभाग भी हाथियों के मूवमेंट पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन इनसे निजात दिलाने उनके पास भी कोई ठोस रास्ता नहीं है। बीती रात हाथियों ने ग्राम बरिमा के 4 ग्रामीणों के घर तोड़ डाले।
मैनपाट में इन दिनों विचरण कर रहा 24 हाथियों का दल रात में यहां के अलग-अलग इलाकों में पहुंच रहा है। रविवार की रात 3 बजे हाथी ग्राम बरिमा पहुंचे। गांव में उनके पहुंचने की खबर पर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्रामीण परिवार सहित घर से बाहर निकल आए और गांव छोड़कर भाग गए। इस दौरान हाथियों ने तीन भाइयों सीताराम, कुंवर साय व नैहर साय तथा बालभगवान के घर तोड़ दिए।
इसके बाद हाथी वहां से जंगल की ओर रवाना हो गए। इधर ग्रामीण सुबह जब अपने घर पहुंचे तो वहां का नजारा देख ठिठक गए। घर से बचा-खुचा सामान निकालकर उन्होंने दूसरे के घर शरण ली। हाथी अभी भी बरिमा से लगे जंगल में डटे हुए हैं। हाथियों के क्षेत्र में डटे होने से ग्रामीणों में दहशत का आलम है।
हाथियों ने मैनपाट के अलग-अलग इलाके में 34 घर तोड़ डाले हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत कंडराजा के आश्रित ग्राम बैगापारा में 14, सरनापारा में 8, चोरकीपानी में 7, कंडराजा में 1 व बरिमा में 4 घर तोड़े। वहीं ग्राम कंडराजा के एक ग्रामीण की जान भी उन्होंने ली है।