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Stubble Burning Control: पराली जलाने पर केंद्र का बड़ा एक्शन, NCR में तैनात होगा ‘पराली सुरक्षा बल’

NCR: दिल्ली-एनसीआर में पराली से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 544.15 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की है। 70 तहसीलों में ‘पराली सुरक्षा बल’ तैनात होगा। किसानों को नई मशीनें, कस्टम हायरिंग सेंटर और पराली के स्थायी बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

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Stubble Burning Control

Stubble Burning Control: NCR में तैनात होगा पराली सुरक्षा बल(फोटो-IANS)

NCR Pollution: दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण की बड़ी वजह पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के तहत 544.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। केंद्र ने एनसीआर के 14 जिलों की 70 तहसीलों में विशेष ‘पराली सुरक्षा बल’ तैनात करने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि पराली को केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए बायोमास बिजली संयंत्रों, सीबीजी इकाइयों, एथेनॉल प्लांट और पेलेट उद्योगों में इसके उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

पराली जलाने की घटनाएं घटीं, चुनौती अब भी बड़ी


शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 2018-19 में सीआरएम योजना शुरू होने के बाद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत राज्यों को 4,266 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। इसके तहत 3.54 लाख से ज्यादा मशीनें किसानों तक पहुंचाई गईं और 43,500 से अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए। इसके बावजूद इस वर्ष धान कटाई के दौरान लगभग 2.76 करोड़ टन पराली निकलने का अनुमान है, जिससे प्रभावी प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है।

निगरानी, बाजार और खेती में बदलाव पर फोकस


सरकार ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए तीन स्तरीय रणनीति तैयार की है, जिसमें निगरानी, बाजार विकास और खेती के तरीकों में बदलाव पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना के तहत खेतों में आधुनिक मशीनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि फसल अवशेषों का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके। साथ ही रियल टाइम निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी, जिससे पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। पराली के लिए स्थायी बाजार विकसित करने पर भी सरकार का फोकस है, ताकि किसान इसे आर्थिक संसाधन के रूप में इस्तेमाल कर सकें। राज्यों को 46 हजार से अधिक नई मशीनें उपलब्ध कराने, 910 नए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने और 141 पराली आपूर्ति शृंखला परियोजनाएं विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके अलावा कम अवधि वाली धान की किस्मों और डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक को बढ़ावा देकर पराली जलाने की मूल वजह को कम करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।