मंदिर

बिना नींव के टिका है छठी शताब्दी का मां चामुंडा मंदिर, सालों से जल रही अखंड ज्योत, जानें इसकी कहानी

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र में गजनीखेड़ी का प्राचीन मां चामुंडा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक मान्यताएं इसे खास बनाती हैं।
2 min read
• •
Oct 13, 2026
Feature image
Maa Chamunda Devi Temple: बिना नींव के टिका है छठी शताब्दी का मां चामुंडा मंदिर (फोटो सोर्स- Patrika)

Maa Chamunda Devi Temple: शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ ही प्रदेश के प्राचीन देवी मंदिरों की महिमा भी भक्तों की आस्था का केंद्र बनी रहती है। ऐसा ही एक अनूठा धाम गजनीखेड़ी में स्थित मां चामुंडा का मंदिर है, जहां माता रानी के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसा ही एक मंदिर धर्मिक नगरी उज्जैन के गजनीखेड़ी इलाके में स्थित मां चामुंडाधाम इतिहास समेटे है।

क्या है मंदिर की विशेषता?

मंदिर की विशेषता यह है कि यह बिना नींव के टिका है। माता रानी की सेवा-पूजा कर रहे जीवन गिरी गोस्वामी के अनुसार मंदिर में वर्षों से अखंड ज्योत जल रही है। सावन में हरियाली अमावस्या के दूसरे दिन माता रानी के प्रांगण में एक दिनी मेले का आयोजन होता है, जबकि गांव में आधे दिन का मेला लगता है। इसमें हजारों दर्शनार्थी आते हैं। शारदीय नवरात्र में सुबह-शाम हजारों माता भक्त आरती में शामिल होते हैं। महाअष्टमी पर भक्तों के सहयोग से 2100 से अधिक कन्याओं के पूजन और भंडारे का भव्य आयोजन किया जाता है।

सप्तमातृका के रूप में विद्यमान थीं देवी

इतिहास के अनुसार, मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी में गुप्त शासकों ने कराया था। यहां सप्तमातृका के रूप में देवी विद्यमान थीं। परमार काल में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। 13वीं शताब्दी में गुजरात से आए औदिच्य ब्राह्मणों ने ठाकुर के रूप में क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। पलवा राजघराने ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, जिसका शिलालेख मंदिर की दीवार पर अंकित है। प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता विष्णुधर वाकणकर ने 1981 में यहां खुदाई और अन्वेषण कराया था। दो वर्ष से भी अधिक समय तक रुनीजा और गजनीखेड़ी के टीलों पर खुदाई चली, तो परमारकालीन अवशेष, मिट्टी पात्र, धातु के सिक्के, मुद्राएं प्राप्त हुई।

गजनवी ने ढहा दिया था मंदिर

किवदंती अनुसार, गजनवी ने धार पर आक्रमण करते समय मंदिर को नष्ट कर दिया था। गजनीखेडी गांव के समीप विशाल मैदान है, जिसे आज भी फौज के पड़ाव के नाम से जाना जाता है। पलवा राजघराने के अश्विनसिंह पलवा बताते हैं, मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए पलवा, रुनीजा राजपरिवार की ओर से राशि दी थी। पलवा परिवार भोपाल स्थित हमीदिया लाइब्रेरी से मंदिर का मूल चित्र लाने में सफल रहा। संस्था के अशोक वैष्णव, हेमराज चावड़ा, सुनील यादव, मोहन चौधरी और कौटिल्य सिंह राठौर ने बताया विधायक जितेंद्र सिंह पंड्या ने विधायक निधि से लाखों रुपए के विकास कार्य करवाए हैं।

Updated on:
13 Oct 2026 02:48 pm
Published on:
13 Oct 2026 02:47 pm