
Crime news:मध्यप्रदेश में सरकार बेटियों को बचाने और सशक्त करने के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही हैं लेकिन बुंदेलखंड के ग्रामीण अंचलों में बेटियों को लेकर सोच नहीं बदली। बीते दिन यहां से एक ऐसी खबर आई कि सभी के रोंगटे खड़े हो गए। दादी ने अपनी ही 20 दिन की पोती की गला दबाकर हत्या कर दी। दादी का मानना था कि बेटी के कारण परिवार को दूसरों के सामने झुकना पड़ेगा। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने दादी को गिरफ्तार करके केस दर्ज कर लिया है।
बन्नेबुजुर्ग में दादी रेखा आदिवासी (45) ने 20 दिन की पोती मनीषा की गला घोंट कर हत्या कर दी। बच्ची मां पुक्खन आदिवासी के साथ सो रही थी। तड़के 3 बजे रेखा ने मासूम मनीषा को उठाया और कुछ देर बाद मां के पास लिटा दिया। काफी देर तक बच्ची के शरीर में हलचल नहीं हुई तो मां को संदेह हुआ। उसने बच्ची को हिलाया, कोई हरकत नहीं हुई तो वह रोने लगी और घटना की सूचना पुलिस को दी गई।
अपने जिगर के टुकड़े को खाने के लिए मां पुक्खन फफक पड़ीं। बोली सास रेखा को बेटियां पसंद नहीं थी। बेटी के जन्म के बाद से ही वह उससे बुरा व्यवहार कर रही थी। पति धनीराम दिल्ली में मजदूरी करता है। ऐसे में सास उसे खाना भी नहीं देती थी। कहती थी, बेटी होगी तो परिवार को दूसरे के सामने झुकना पड़ेगा। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी दादी और परिजनों ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए एक मनगढ़ंत कहानी रची। उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। दादी ने बताय बताया कि बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई थी इसी दौरान उसकी मौत हो गई।
पहले परिजनों ने पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। बच्ची की झाड़ फूंक के बाद यह घटना होने की बात कही। हालांकि, पुलिस की जांच में मामला संदिग्ध लगा और पूछताछ के बाद सच्चाई सामने आ गई। बाद में दादी ने जुर्म कबूल लिया।
घटना के बारे में पलेरा थाना प्रभारी प्रीति भार्गव के अनुसार, आरोपी दादी को बच्ची के जन्म के बाद से ही बेटी होने को लेकर नाराजगी थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वह कथित तौर पर बेटियों को पसंद नहीं करती थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी रेखा आदिवासी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।