टीकमगढ़

तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा राष्ट्रीय कृषि बाजार

कृषि उपज मंडी

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Jan 28, 2025
कृषि उपज मंडी

वर्ष 2017 फरवरी से आज तक एक भी व्यापारी ने नहीं की ऑनलाइन अनाज की खरीदी

टीकमगढ़. केंद्र सरकार ने जिला कृषि उपज मंडी में राष्ट्रीय कृषि बाजार की लेबोरेटरी तैयार की है। असमें १५० से अधिक व्यापारियों ने पंजीयन कराया है। इस वर्चुअल बाजार के माध्यम से देश के किसी भी कोने का व्यापारी किसान का अनाज खरीद सकता है और ऑनलाइन बेच सकता है। इसके माध्यम से अनाज के लिए पारदर्शी कीमत मिलती है। लेकिन वर्ष २०१७ से आज तक तकनीकी समस्या के कारण बाजार से एक भी व्यापारी ने अनाज नहीं खरीदा है।
केंद्र सरकारी की राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना (ई-नेम) किसानों के लिए सरल और पारदर्शी है। इस योजना के तहत जिला कृषि उपज मंडी में फरवरी २०१७ में लेबोरेटरी तैयार की गई थी। व्यापारियों के पंजीयन भी किए गए थे। यहां पर मशीनों के माध्यम से अनाज की गुणवत्ता की जांच सुविधा है। लेकिन यहां जांच के लिए ग्रेडर की नियुक्ति नहीं है। इसी वजह मशीनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस कारण से मशीनरी और कंप्यूटर यंत्र धूल खा रहे है।

व्यापारी और किसान नहीं समझ पा रहे तकनीकी
राष्ट्रीय कृषि बाजार में अनाज खरीदी की ऑनलाइन प्रक्रिया है। मोबाइल और कंप्यूटर में अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल पर गीला, सूखा और अनाज के भाव की कीमत को रखना और ऑनलाइन अनाज को खरीदने की प्रक्रिया होती है। लेकिन व्यापारी और किसान इसे समझ नहीं पा रहे है। इसके लिए छह सालों से प्रशिक्षण भी दे रहे है, लेकिन योजना का लाभ नहीं ले पा रहे है। इस कारण से यह प्रक्रिया बंद पड़ी है।

यह आ रही समस्याएं
अधिकारियों और व्यापारियों ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार वर्चुअल बाजार है। मंड़ी के सैंपल को पोर्टल में दर्शाकर नीलाम के दाम फिक्स करके कुछ समय के लिए छोड़ देते है। उसके बाद देश का कोई भी व्यापारी अनाज की क्वालिटी और दाम को देखकर खरीदने के लिए ऑक्सन को लॉक कर देता है। लेकिन उनके एजेंट नहीं है। इसके साथ ही एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में अनाज खरीदने का टैक्स और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस कारण से कोई भी व्यापारी अनाज खरीदने और किसान अनाज बेचने के लिए आगे नहीं आ रहा है।

अनाज की अच्छी कीमत का था उद्देश्य
राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नेम) अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है। अनाज को राष्ट्रीय बाजार बनाने के लिए मौजूदा एपीएमसी मंडियों को ऑनलाइन नेटवर्क से जोड़ता है। इस बाजारों में प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके व्यापारी और किसानों के बीच सूचना की विषमता को दूर करना एवं वास्तविक मांग और आपूर्ति के आधार पर उचित वास्तविक मूल्य की खोज को बढ़ावा देकर कृषि विपणन में एकरूपता को बढाना इस योजना का उद्देश्य है। यह प्लेटफ ॉर्म देशभर में समय पर ऑनलाइन भुगतान के साथ उत्पादन की गुणवत्ता के आधार पर पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से बेहतर कीमत प्रदान करना है।

इनका कहना
राष्ट्रीय कृषि बाजार के लिए यहां पर लेबोरेटरी की गई है। इसके माध्यम से अनाज की गुणवत्ता की जांच करके ऑक्सन में दाम लॉक हो जाते है। यह योजना की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। लेकिन व्यापारी आगे नहीं आए है। इसमें तकनीकी समस्या आ रही है। अब ई-मंडी से ही काम किया जा रहा है।
नितिन कुमार शर्मा, सहायक उपनिरीक्षक एवं प्रभारी राष्ट्रीय कृषि बाजार लेबोरेटरी टीकमगढ़।

राष्ट्रीय बाजार एक पारदर्शी योजना है, लेकिन व्यापारी और किसानों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। किस तरह से अनाज की नीलामी, भुगतान होना है। प्रचार प्रसार हो। तब जानकारी हो।
राजेश साहू, अध्यक्ष व्यापारी संघ कृषि उपज मंडी टीकमगढ़।

Published on:
28 Jan 2025 11:40 am
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