सडक़ों पर बैठे मवेशी।
जिले में ५5 गोशाला पूर्ण के बाद भी नहीं रखे जा रहे मवेशी
टीकमगढ़. जिले में किसानों ने २ लाख ३१ हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवाई की गई है। किसानों ने फसलों की सुरक्षा के लिए तार फेसिंग करवाई है, लेकिन रात्रि के समय आवारा मवेशी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है। जबकि शासन ने आवारा मवेशियों को रखने के लिए १०५ गोशालाओं को स्वीकृत किया है। जिसमें ५५ गोशालाएं पूर्ण हो गई और उनमें से कुछ ही गोशालाओं में मवेशी है, बाकी खाली पड़ी है।
आवारा मवेशी किसानों के लिए मुसीबत बन गए है और फ सलों को सुरक्षित रखने के लिए किसानों को दिनरात रखवाली करनी पड़ रही है। किसान गांवों से मवेशी शहर और जंगल में छोड़ते है और वह फि र वापस खेतों में पहुंच जाते है। शहर में भी आवारा मवेशियों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब आवारा मवेशियों से फ सलों को बचाना मुश्किल हो रहा है। आवारा मवेशियों को रखने के लिए बनाई गई गोशालाओं से भी यह समस्या हल नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि गोशाला में मवेशी छोडक़र आते है और कुछ देर बाद उन्हें वहां से छोड़ दिया जाता है। जिससे फि र वह खेतों में पहुंच जाते है। यदि गोशाला में मवेशियों को रखा जाए तो किसानों को राहत मिलेगी।
खरीफ फसलों को मवेशियों ने पहुंचा दिया नुकसान
आवारा मवेशियों से किसानों को लगातार समस्या हो रही है। आवारा मवेशी खेतों में पहुंचकर फ सलों को नुकसान पहुंचा रहे है। जिसके चलते किसानों की चिंताएं बढ़ रही है। किसानों ने बताया कि इस साल अच्छी बारिश होने से फसलों की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है, लेकिन आवारा पशुओं ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की संख्या में आवारा मवेशी घूम रहे है।
फसलों की सुरक्षा करना हो रहा मुश्किल
बनयानी निवासी किसान कृष्णपाल सिंह लोधी, रघुनाथ विश्वकर्मा, राकेश कुशवाहा और रामसिंह कुशवाहा ने बताया कि कर्ज लेकर खरीफ की बोवनी कर ली है, लेकिन फ सल की सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। मवेशियों से खेतों की रखवाली करने के लिए तार फेंसिंग भी करवाई है, लेकिन आवारा पशु इनको लांघ कर भीतर घुस जाते है और फ सल को खा जाते है।
३८ गोशालाओं को जारी हुआ था अनुदान
जिले में संचालित गोशाला परियोजना के तहत भूसे दाने के लिए गौसंवर्धन बोर्ड से उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा जिला पंचायत टीकमगढ़ को अगस्त 2022 से फ रवरी 2023 तक की 98,88,462 की राशि स्वीकृत हुई थी। जिसमें देवरदा, इमलाना, करमासनहटा, खजरार, लुहर्रा, लखेरी, बुदौरा, चंद्रपुरा, लडवारीखास, रमपुरा, सरकर खालसा, बम्हौरीखास कुम्हैंडीखास, मांची, रामनगर, मातौल, दानगा, बूदौर, गोवा, हनौता, खेरा, महेन्द्र महेबा बराना, गडारी, जरूवा, कुडयाला रतवास सिमराखुर्द, टीला नरेनी, टोरी, अंतौरा, गोपालपुराखास, जशवंतनगर, मामौन, सापौन, डूंडा, श्रीनगरखास, सुंदरपुर सहित ३८ गोशालाएं शामिल थी। लेकिन वहां की स्थिति उलट है।
इनका कहना
जिले की गोशालाओं में गायों को भेजा रहा है। सडक़ों पर बैठे मवेशियों को गोशालाओं में छोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। गोशालाओं में रह रहे गायों को बाहर निकालने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
आरके जैन, उपसंचालक पशु पालन एवं डेयरी विभाग टीकमगढ़।