
राणोली-कठमाणा. नानेर से झिराना के बीच 10 किलोमीटर दूरी में डामर सडक़ पूरी तरह जर्जर हो गई है। नवीन डामरीकरण सडक़ स्वीकृति को लेकर पंचायत समिति सदस्य मोहम्मद जाकिर ने सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री यूनूस खान से गत दिनों भेंट कर उक्त सडक़ के नवीनीकरण की मांग की थी।
उन्होंने मंत्री खान को बताया कि इस सडक़ पर बावड़ी में जलदेवी माता तथा बीसलपुर में गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां हजारों श्रद्धालु आते जाते हैं।
वहीं टोडारायसिंह पर्यटन स्थल पर घूमने के लिए जाते हंै। वहीं यह सडक़ करीब 100 गांवों को एक दूसरे से जोड़ती है। ऐसे में करीब दो हजार से अधिक वाहनों का यहां से आवागमन होता है।
ऐसे में सडक़ के गहरे गढ््डों में तब्दील होने या नामोनिशान मिटते हुए कंकरीट होने से आए दिन दुर्घटना घटित होती रहती है।
अब तो ग्रामीणों ने सडक़ के समानान्तर खेतों में से होकर वैकल्पिक रास्ता तक कई जगह पर बना लिया है।
इस पर मंत्री ने अधीक्षण अभियंता सार्वजनिक निर्माण टोंक से केन्द्रीय सडक़ विकास कोष में उक्त रोड़ का प्रस्ताव तैयार करवाते हुए लिया और शीघ्र स्वीकृति जारी करने का आश्वासन दिया।
उनके साथ नंदा गौरा, रामकरण, जगदीश महेन्द्र आदि मौजूद थे। इसके बावजूद विभाग ने अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिय।
प्रस्ताव भिजवा दिया
मंत्री ने अधीक्षण अभियंता से केन्द्रीय सडक़ विकास कोष में प्रस्ताव मांगे जाने पर प्रस्ताव भिजवा दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य चालू करा दिया जाएगा।
सी.एल. बुनकर, सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग पीपलू
यहां भी है यही हाल
राणोली-कठमाणा. गहलोद-जंवाली नानेर रोड पर नॉन पेचेबल स्टेट रोड फंड योजना में 19 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत से डामरीकरण की स्वीकृति मिले डेढ़ माह हो गया, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है।
इससे गहलोद-जंवाली-नानेर के बीच खस्ताहाल सडक़ की दूरी तो मात्र 20 किलोमीटर है, लेकिन यह टोंक से अजमेर की 150 किमी की सीधी आवाजाही में खलल डाल रही है।
खस्ताहाल सडक़ के कारण सोहेला, नाथड़ी होते हुए जाने से 170 किमी या देवली, केकड़ी होते हुए अजमेर जाने पर 190 किमी दूरी का चक्कर होता है।
यह सडक़ इतनी जर्जर हो गई है कि डामर सडक़ का पूरी तरह नामोनिशान मिट गया है। कदम कदम पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। जर्जर होने से वाहन चालकों, राहगीरों को आवाजाही में परेशानी हो रही है।
इन गांवों को विशेष परेशानी
खस्ताहाल सडक़ से टोडारायसिंह, मालपुरा, पीपलू तहसील के गांव गहलोद, किशनपुरा, नयागांव, गाता, मोलीपुरा, मूंडिया, जंवाली, नानेर, बड़ागांव, मोतीपुरा, कलमंडा, कडीला, डूंगरी आदि 100 से अधिक गांवों को विशेष परेशानी होती है।
यह सडक़ संभाग मुख्यालय अजमेर को सीधी आवाजाही से जोड़ती है। ऐसे में इसे राज्य मार्ग घोषित किया जाए तो जिला मुख्यालय सीधी आवाजाही से संभाग मुख्यालय से जुड़ सकता है।.
10 किमी के सफर में लग रहा एक घंटा
सडक़ पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है कि अब हिचकोले खाते हुए सफर करना पड़ता है। 10 किलोमीटर की दूरी में वाहनों के रेंगकर चलने से करीब एक घंटा लग जाता है।
वहीं सडक़ पर कंकरीट फैले होने से वाहनों में पंक्चर होने सहित तकनीकी खराबी आ रही है तथा दुपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे है।
शीघ्र कार्य शुरू कराएंगे
आज ही टेण्डर हुए है। टेण्डर छुड़ाने वाले हरिराम गोलाडा द्वारा शीघ्र कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
सी.एल. बुनकर, सहायक अभियता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पीपलू