
Tonk: टोंक में चुनावी प्रक्रिया के दौरान की तस्वीर (फोटो-पत्रिका)
टोंक। निकाय चुनाव के बीच टोंक के डारड़ा हिंद गांव में ग्रामीणों का विरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। गांव को नगर परिषद क्षेत्र में शामिल किए जाने और परिसीमन के विरोध में ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था। इसी क्रम में वार्ड-2 से नामांकन दाखिल करने वाले सभी चार प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इसके साथ ही इस वार्ड में चुनावी मुकाबला ही खत्म हो गया है। अब टोंक नगर परिषद के 60 वार्डों में से 59 वार्डों में ही मतदान होगा।
नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस ने इस वार्ड से सीट खाली छोड़ी थी। जबकि भाजपा से सुनिता ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। इसके अलावा तीन अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। गुरुवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन भाजपा प्रत्याशी सुनिता समेत निर्दलीय गायत्री चौधरी, विमला और सुमन ने अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया। ऐसे में इस वार्ड में अब चुनाव नहीं होगा।
डारड़ा हिंद के ग्रामीण लंबे समय से गांव को नगर परिषद में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे हैं। परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही ग्रामीणों ने मांग उठाई थी कि ग्राम पंचायत मुख्यालय डारड़ा हिंद को ग्रामीण क्षेत्र में ही रखा जाए। ग्रामीणों का तर्क है कि गांव कृषि प्रधान है और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास के लिए पंचायत व्यवस्था ज्यादा उपयुक्त है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव की बड़ी आबादी खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। करीब 40 प्रतिशत आबादी भूमिहीन होने का दावा करते हुए ग्रामीणों ने कहा था कि नगर परिषद में शामिल होने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के लिए लागू योजनाओं और सुविधाओं को लेकर उनकी चिंताएं बढ़ी हैं।
ग्रामीणों ने पहले ही महापंचायत कर चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया था। ग्राम संघर्ष समिति के बैनर तले हुई महापंचायत में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने मतदान नहीं करने का फैसला किया था। साथ ही गांव से किसी स्थानीय व्यक्ति को चुनाव मैदान में नहीं उतारने और बाहरी प्रत्याशियों का समर्थन नहीं करने की बात भी कही गई थी।
अब चारों प्रत्याशियों के नामांकन वापस लेने से ग्रामीणों के इस फैसले का असर चुनावी प्रक्रिया पर साफ दिखाई दे रहा है। वार्ड-2 में किसी प्रत्याशी के मैदान में नहीं रहने से मतदान की स्थिति भी बदल गई है।
ग्रामीणों के बहिष्कार के ऐलान के बाद प्रशासन ने उन्हें समझाने का प्रयास किया था। जिला कलक्टर एवं निर्वाचन अधिकारी टीना डाबी, एसपी, एसडीएम और तहसीलदार ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना था। सड़क समेत अन्य समस्याओं के प्राथमिकता से समाधान का भरोसा भी दिलाया गया था।
इसके बावजूद परिसीमन के मुद्दे पर ग्रामीणों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अब सभी चार प्रत्याशियों के नामांकन वापस लेने के बाद डारड़ा हिंद का विरोध निकाय चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
Updated on:
03 Sept 2026 06:28 pm
Published on:
03 Sept 2026 06:00 pm
