आने वाले इंटरनेशनल गेम्स में भारत को पदक दिलाने का मुकेश कमांडों का सपना है।
टोंक. जिले की टोडारायसिंह तहसील के माधोगंज गांव में किसान का बेटा मुकेश कमाण्डों शूटिंग व कुश्ती के क्षेत्र में जौहर दिखा रहा है। मुकेश ने अब तक स्वर्ण पदक सहित कई पदक जीत चुका है। उसके इस कारनामें को देखते हुए पुलिस के कई बड़े अधिकारियों ने उसे सम्मानित भी किया।
मुकेश 2010 में पुलिस सेवा में भर्ती रहकर टोंक में सेवाएं देने के साथ पहले कुश्ती व बाद में शूटिंग में कामयाबी हासिल की। मुकेश का जन्म 5 जुलाई 1986 को शंकरलाल चौधरी के घर हुआ। वह पिता शंकरलाल व माता कन्या देवी का लाडला रहा है। मुकेश ने कक्षा 5 तक की शिक्षा सन् 2003 में माध्यमिक विद्यालय बासेड़ा में ग्रहण की। मुकेश दादाजी हरनाथ देवन्दा के पौत्र हैं। मुकेश ने 12वीं की शिक्षा टोंक के कोठी नातमाम स्कूल से ग्रहण की।
2008 में पुलिस सेवा में भर्ती
धीरे-धीरे मुकेश ने आर्मी एबीएसएफ, एसीआरपी व पुलिस की वैकेंसी में फार्म लगाना शुरू कर दिया। कम से कम 15 से 20 तक वैकेेंसी में भाग लिया, लेकिन वरीयता में नहीं आने की की वजह से वह असफल हुआ, लेकिन मुकेश ने हिम्मत हारी। सन् 2008 में पुलिस में भर्तीं हो गई। खेरवाड़ा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में बेसिक टे्रनिंग पूरी करने के बाद टोंक पुलिस में कार्यरत रहे। सन् 2010 से 2012 तक जिले की पूर्व विधायक और चिकित्सा मंत्री के पीएसओ रहे।
पहली कुश्ती व शूटिंग में जीता पदक
सन् 2012-13 में जिला पुलिस ने अजमेर रेंज पुलिस खेलकूद कराए तो मुकेश ने भी पहली बार कुश्ती व शूटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया। दोनों में ही 2 सिल्वर मेडल जीता। फिर राज्य स्तर के लिए रेंज की टीम में मुकेश का चयन किया गया। अजमेर किशनगढ़ में टीम को रखा गया।
जहां मुकेश की मुलाकात गोपीराम सब इंस्पेक्टर शिवराज कमांडो व ओमप्रकाश चौधरी हुई। गोपीराम के सान्निध्य में टीम के साथ मुकेश कमांडों ने गहन अभ्यास किया। इसके बाद किशनगढ़ फायरिंग रेंज पर प्रैटिक्स दी जाती। सन् 2013 में कोटा रेंज में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता मेें भाग लिया।
असफल होने के बाद मुकेश वापस टोंक आ गया।उसने 2 साल तक गेम खेलना छोड़ दिया फिर टोंक विधायक अजीत सिंह मेेहता के पास पीएसओ ड्यूटी के बीच में ओमप्रकाश व शिवराज कमांडों ने मुकेश को शूटिंग के लिए वापस बुला लिया। सन् 2016 में वापस मुकेश ने शूटिंग में प्रेटिक्स शुरू की।
पदकों की भरमार
रेंज स्तरीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में मुकेश ने अनेकों गोल्ड व सिल्वर मेडल जीते। बाद में ओपन स्पोट्र्स की शूटिंग में भी ओमप्रकाश और शिवराज कमांडों के कहने पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया। इसके चलते साथी खिलाड़ी सुनीता चन्द्रावत व रेवत राम की राइफल से मुकेश अपने पहले ही प्रयास में 2016-17 में भारतीय ख्याति प्राप्त शूटर होने का गौरव प्राप्त किया।
तब ओमप्रकाश चौधरी व शिवराज चौधरी ने मुकेश को शूटिंग की बारीकियां समझाना शुरू की। मुकेश ने राष्ट्रीय खिलाड़ी बनते ही जर्मनी से अपनी राइफल मंगवाकर जयपुर जगतपुरा शूटिंग रेंज में टीम मैनेजर श्याम सिंह, कोच ओमप्रकाश चौधरी व शिवराज कमांडों की देखरेख में प्रेटिक्स जारी रखी।
जयपुर में 5जी बटालीन में रामसिंह एडीशनल एसपी के नरसिम्हा राव, मुख्य खेल अधिकारी राजस्थान पुलिस व डीजीपी राजस्थान पुलिस ओ.पी. गहलोत्रा के अंडर में रहकर निरन्तर अभ्यास जारी रखा। इसके चलते 29 जनवरी से 2 फरवरी 2018 तक इंदौर में हुई 11वीं अखिल भारतीय पुलिस स्पोट्र्स शूटिंग में राजस्थान टीम से खेलते हुए 2 गोल्ड व एक सिल्वर मेडल प्राप्त किया। अब आने वाले इंटरनेशनल गेम्स में भारत को पदक दिलाने का मुकेश कमांडों का सपना है।