
Sachin Pilot। फोटो पत्रिका नेटवर्क
Sachin Pilot Statement on Sonam Wangchuk : टोंक। कांग्रेस महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक और भर्ती घोटालों से युवाओं का व्यवस्था से विश्वास उठ चुका है। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें और सरकार सोनम वांगचुक के अनशन को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संवाद शुरू करे। पायलट शुक्रवार को टोंक विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। उन्होंने लक्ष्मीपुरा जाटान, हमीरपुर और कुहाड़ा गांव में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की।
सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सोनम वांगचुक पिछले करीब 19-20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई सार्थक पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत तक करने नहीं पहुंचा, जबकि हाईकोर्ट भी इस मामले में हस्तक्षेप कर चुका है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
पायलट ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस देशभर में छात्रों के मुद्दों को लेकर अभियान चला रही है। कोटा से इसकी शुरुआत की गई थी और अब यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक के बाद एक पेपर लीक होने के बावजूद किसी की जवाबदेही तय नहीं हो रही है।
पायलट ने राजस्थान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के बजाए केवल छोटे अधिकारियों के तबादले किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा, चिकित्सा और कानून व्यवस्था जैसे तीनों प्रमुख मोर्चों पर राज्य सरकार विफल साबित हुई है।
सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर भी पायलट ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हित साधने और प्रतिशोध की भावना से तबादले किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार को स्पष्ट नीति और मापदंडों के आधार पर निर्णय लेने चाहिए न कि राजनीतिक दुर्भावना से।
राजनीतिक बयानबाजी पर पूछे गए सवाल के जवाब में पायलट ने कहा कि सत्ता में रहने और पद से हटने के बाद नेताओं के सुर बदल जाते हैं। लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा और आचरण मर्यादित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैचारिक और सैद्धांतिक विरोध लोकतंत्र की ताकत है, जबकि व्यक्तिगत टिप्पणियां और सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं।
पायलट ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर भी केंद्र सरकार की नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पर्याप्त तकनीकी तैयारी और वाहन कंपनियों से समन्वय किए बिना इस व्यवस्था को लागू किया गया, जिससे आम लोगों के वाहनों के इंजन प्रभावित हो रहे हैं और माइलेज भी कम हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करना और तेल की खपत घटाना आवश्यक है। लेकिन इसके लिए वैज्ञानिक और व्यवहारिक तैयारी जरूरी थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष आगामी मानसून सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, एथेनॉल नीति और युवाओं से जुड़े सभी जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा।
Updated on:
17 Jul 2026 06:33 pm
Published on:
17 Jul 2026 06:33 pm
