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मानसून मेहरबान: बीसलपुर बांध में 5 दिन में 83 दिन की सप्लाई जितना आया पानी, पेयजल संकट से राहत

Bisalpur Dam News: बीसलपुर बांध में मानसून की बारिश से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह 6 बजे जलस्तर 313.68 आरएल मीटर और जल भंडारण 26.079 टीएमसी (67.38%) दर्ज किया गया। पिछले पांच दिनों में 0.83 टीएमसी पानी की आवक हुई है।
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टोंक

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Arvind Rao

Jul 07, 2026

Bisalpur Dam Water Level

Bisalpur Dam (Patrika Photo)

Bisalpur Dam Water Level: टोंक: पेयजल आपूर्ति की प्रमुख जीवनरेखा माने जाने वाले बीसलपुर बांध में मानसून की सक्रियता का सकारात्मक असर लगातार दिखाई दे रहा है। जलग्रहण क्षेत्र में रुक-रुककर हो रही बारिश से बांध के जलस्तर और जल भंडारण में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले पांच दिन में बांध में करीब 0.83 टीएमसी पानी की आवक हुई है, जिससे जल संसाधन विभाग के साथ प्रदेश के लाखों लोगों को राहत मिली है। बढ़ते जलस्तर से आगामी महीनों में पेयजल संकट की आशंका भी काफी हद तक कम होती नजर आ रही है।

जल संसाधन विभाग की मंगलवार सुबह 6 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, बीसलपुर बांध का जलस्तर 313.68 आरएल मीटर दर्ज किया गया। बांध में 26.079 टीएमसी पानी संग्रहित है, जो इसकी कुल भराव क्षमता का 67.38 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों में जलग्रहण क्षेत्र में 5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि मानसून सत्र में अब तक कुल 253 मिमी बारिश हो चुकी है।

चार दिन में लगातार बढ़ा जल भंडारण

3 जुलाई को बांध का जलस्तर 313.57 मीटर तथा जल भंडारण 25.320 टीएमसी (65.93 प्रतिशत) था। चार जुलाई को यह बढ़कर 313.63 मीटर और 25.734 टीएमसी (66.49 प्रतिशत) हो गया। 5 जुलाई को जलस्तर 313.66 मीटर तथा जल भंडारण 25.941 टीएमसी दर्ज किया गया। सोमवार को जलस्तर 313.69 मीटर और जल भंडारण 26.148 टीएमसी पहुंच गया था।

अच्छी बारिश पर टिकी उम्मीदें

बीसलपुर बांध से जयपुर, अजमेर, टोंक सहित कई शहरों और हजारों गांवों को पेयजल आपूर्ति होती है। ऐसे में बांध में लगातार बढ़ रहा जल भंडारण प्रदेश के लिए राहतभरी खबर माना जा रहा है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में वर्षा की तीव्रता में उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन कैचमेंट क्षेत्र में निरंतर बारिश से पानी की आवक बनी हुई है।

जल संसाधन विभाग की नजर अब मानसून के अगले चरण पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में जलग्रहण क्षेत्र में अच्छी बारिश का दौर जारी रहा तो बांध का जलस्तर और जल भंडारण तेजी से बढ़ सकता है। इससे पेयजल व्यवस्था के साथ जल प्रबंधन और किसानों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।