
रेल के लिए मिले भूमि, शिलान्यास किया जाए, सालों से चल रहा है मुद्दा
टोंक जिला मुख्यालय को रेल से जोडऩे का मुद्दा सालों पुराना है। इस रेल को एक दशक में कई घोषणा हुई है। लेकिन अभी तक इसका शिलान्यास समेत कई कार्य नहीं हुआ है।
अब केन्द्रीय अंतरिम बजट में राशि स्वीकृत हुई तो उम्मीद जगी है कि टोंक में रेल का सपना पूरा होगा। इसी को लेकर टोंक विकास मंच रेल संघर्ष समिति की ओर से मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा कि टोंक में रेल की मांग सालों पुरानी है। केन्द्र सरकार ने 28 फरवरी 2013 को पूरक बजट में अजमेर, नसीराबाद, सवाईमाधोपुर वाया टोंक रेल लाइन की सशर्त मंजूरी दी थी।
तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से भूमि तथा लागत की 50 प्रतिशत राशि की सहमति अभी तक नहीं दी गई। ऐसे में टोंक की रेल अटकी हुई है। अब गत एक फरवरी को केन्द्र सरकार ने एक सौ करोड़ एक लाख रुपए इस रेल लाइन के लिए स्वीकृत हुए हैं। इससे उम्मीद बंधी है कि टोंक में रेल की सीटी बज जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार को भूमि, 50 प्रतिशत राशि देकर लोकसभा चुनाव से पहले इस परियोजना का शिलान्यास किया जाए।
ताकि टोंक में रेल जल्द आ सके। ज्ञापन देने वालों में समिति संयोजक मोहम्मद अजमल, समन्वयक ओमप्रकाश गुप्ता, पेंशनर्स जिलाध्यक्ष बृजबिहारी शर्मा, हनुमानसिंह सोलंकी, मुमताज खान, मतीन मिर्जा, विष्णु गुप्ता, पोखरलाल जाट, आसिम पठान, अमीनेश जैन, रईस अंसारी आदि शामिल थे।