
राणोली-कठमाणा. कठमाणा का राजकीय प्राथमिक चिकित्सालय प्रशासनिक अनदेखी के चलते कई अव्यवस्थाओं का शिकार है, जिसकी वजह से यहां पहुंचने वाले रोगियों को समुचित उपचार का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कठमाणा निवासी रामजीलाल यादव ने बताया 35 वर्षों पहले यहां उपस्वास्थ्य केंद्र को क्रमोन्नत करके प्राथमिक चिकित्सालय सृजित किया गया था, साथ ही सरकार ने 22 लाख रुपए की लागत से चिकित्सालय का भवन रोगियों को भर्ती करने, व्यवस्थित उपचार करने, दवाओं के रखरखाव को लेकर बनाया गया था।
जिसके समीप ही चिकित्सक आवास भी बनाया गया था। लेकिन चिकित्सक आवास अधूरा रहने के हालातों में इस भवन को हैंड ओवर कर लिया गया, तब से चिकित्सक आवास तो अधूरा ही पड़ा हुआ है, लेकिन भवन में चिकित्सा संबंधी गतिविधियां संचालित हो रही है।
यह भवन देखरेख के अभाव में इन दिनों काफी खस्ताहाल में हुआ है। जिसमें छतों से पानी गिरता है, वहीं चूना भी गिरने सहित लोहे के सरिए दिखने लगे है। ऐसे हाल में चिकित्साकर्मी रोगियों को भर्ती करने तथा महिलाओं के प्रसव कराने में कतराते हैं।
चिकित्सा कर्मी मात्र चिकित्सालय पहुंचने वाले रोगियों को परामर्श देकर नि:शुल्क दवा देते हुए अपने कर्तव्य की इतिश्री करते दिखते हैं। चिकित्सालय के जीर्णोद्धार को लेकर कई बार सीएमएचओ टोंक को स्थानीय चिकित्सा प्रभारी ने पत्र भेजकर अवगत कराया, लेकिन अनदेखी के चलते जर्जर भवन में ही चिकित्सा व्यवस्था चलाना उनकी मजबूरी बनी हुई है।
चिकित्सालय भवन की मरम्मत का कार्य शीघ्र नहीं किया गया तो कभी भी यहां बहुत बड़ा हादसा घटित हो सकता है। मारे भय के चिकित्सा कर्मी वार्ड, कमरों में तो बैठते ही नहीं है, बल्कि चिकित्सालय के बाहर हाल में बैठकर रोगियों की देखभाल करते हैं।
छतों से पानी टपकने के कारण उपचार संबंधी दवाईयां बेकार होती है, वहीं उपकरण जंग खाते दिखे हैं। रात के समय तो यहां कोई चिकित्सा कर्मी नहीं रहता है, बल्कि कॉल करने पर ही उपलब्ध हो पाते है। जिसकी वजह से संस्थागत प्रसव होने की संख्या नगण्य दिखी है।
यहां एंबुलेंस 104, 108 दोनों की सुविधा नहीं है, ऐसे हाल में चिकित्सक को गंभीर रोगियों एवं प्रसव पीडि़तों को अन्यत्र ही रेफर करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वह नहीं जानते की चिकित्सालय में किस का उपचार होता है, कभी कोई प्रसव हुआ हो। मात्र दवा उपलब्ध कराने का सा स्थान लगा है।