
tonk prisoner dies
टोंक: टोंक जिला कारागृह में बंद एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। सवाई माधोपुर के पांवड़ेरा (चौथ का बरवाड़ा) निवासी गणदेव गुर्जर (32) पिछले 8 महीने से मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के एक मामले में टोंक जेल में बंद था। बुधवार सुबह तबीयत बिगड़ने पर उसे टोंक के सआदत अस्पताल से जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
मृतक के परिजनों ने टोंक जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और समय पर इलाज न देने का आरोप लगाते हुए जयपुर में एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी के बाहर दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक भारी हंगामा और प्रदर्शन किया।
मृतक के भाई बसराम गुर्जर ने बताया कि मंगलवार दोपहर 2 बजे जेल के फोन से गणदेव की बात हुई थी। तब उसने कहा था, मेरी बेटी देविका का ध्यान रखना, मैं यहां राजी-खुशी हूं। बसराम ने उसे 10-15 दिन में जमानत का आश्वासन दिया था।
बसराम का आरोप है कि मंगलवार शाम 5 बजे से ही गणदेव की तबीयत खराब थी और रात 8 बजे उसने सीने में दर्द की शिकायत की। रात करीब ढाई बजे हालत बहुत ज्यादा बिगड़ने के बावजूद जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया और वह रातभर दर्द से तड़पता रहा। परिजनों को घटना की जानकारी भी जेल प्रशासन ने नहीं दी, बल्कि साथ बंद दूसरे कैदी के परिजनों से उन्हें पता चला।
परिजनों का आरोप है कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें गणदेव से मिलने नहीं दिया गया। बसराम के अनुसार, टोंक लाइन में तैनात एएसआई निर्मल ने मिलने की जिद्द करने पर धमकी देते हुए कहा, मेरे पास लोडेड पिस्टल है, दूर हो जाओ।
दूसरी ओर, टोंक के एएसआई छाजूलाल ने बताया कि बुधवार तड़के जेल से तीन कैदियों की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी। तीनों को सआदत अस्पताल ले जाया गया, जहां से दो को वापस जेल भेज दिया गया और गणदेव की हालत गंभीर होने पर उसे जयपुर रेफर किया गया।
परिजनों ने जेलर राजेश मीणा और एएसआई निर्मल को तुरंत निलंबित करने, मामले की न्यायिक जांच कराने, मृतक की पत्नी नीतू देवी को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने की मांग की है। गणदेव अपने पीछे पत्नी और तीन महीने की बेटी को छोड़ गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक कारणों का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही चलेगा।
Updated on:
12 Aug 2026 08:42 pm
Published on:
12 Aug 2026 08:38 pm
