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Rajasthan Bridge: खुशखबर, बनास नदी पर बने गहलोद हाई लेवल ब्रिज का लोड टेस्ट सफल, आज से शुरू होगा यातायात

Rajasthan Bridge : टोंक में बनास नदी पर गहलोद में निर्मित हाई लेवल ब्रिज का लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा होने से शनिवार से पुल पर यातायात शुरू कर दिया जाएगा। इससे करीब 40 गांवों को राहत मिलेगी।
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May 30, 2026
Tonk Banas River built Gehlod High Level Bridge Load test successful 40 villages Relief
टोंक. बनास पर बना गहलोद हाई लेवल ब्रिज। फोटो पत्रिका

Rajasthan Bridge : टोंक में बनास नदी पर गहलोद में निर्मित हाई लेवल ब्रिज का लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद शनिवार से पुल पर यातायात संचालन शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि इसका औपचारिक रूप से लोकार्पण भी जल्द होगा। अधिशासी अभियंता नागेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि 26 मई से प्रारंभ हुआ ब्रिज का लोड टेस्ट सुबह 6 बजे पूर्ण हुआ। परीक्षण में पुल को भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुरूप यातायात संचालन के लिए सुरक्षित एवं उपयुक्त पाया गया।

नागेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि ब्रिज का परीक्षण पांच चरणों में किया गया, जिसमें पुल की भार क्षमता, संतुलन एवं संरचनात्मक मजबूती की जांच की गई। परीक्षण के दौरान विभागीय एवं थर्ड पार्टी तकनीकी स्टाफ की ओर से लगातार मॉनिटरिंग की गई तथा सभी तकनीकी मानकों की पालना सुनिश्चित की गई। लोड टेस्ट सफल होने के बाद पुल पर यातायात संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया। अतिरिक्त मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता ने भी समय-समय पर परीक्षण स्थल का निरीक्षण किया।

मुख्यालय से कट जाता था संपर्क

बारिश के दौरान गहलोद रपटे के टूट जाने से हर वर्ष करीब दो से तीन माह तक 30 से 40 गांवों का टोंक जिला मुख्यालय से संपर्क कट जाता था। लोगों को 30 से 40 किलोमीटर लंबे मार्ग से आवागमन करना पड़ता था। हाई लेवल ब्रिज बनने से अब क्षेत्रवासियों को इस समस्या से राहत मिलेगी। विभाग का दावा है कि आगामी बरसात में यह पुल स्थायी समाधान साबित होगा।

पांच चरणों में हुई प्रक्रिया

पहले चरण में 24 घंटे तक तापमान के कारण आने वाले डिफ्लेक्शन को मापा गया। दूसरे चरण में 27-27 टन भार वाले नौ ट्रकों को निर्धारित स्पान पर क्रमवार खड़ा कर परीक्षण किया गया। तीसरे चरण में 243 टन कुल भार को 24 घंटे तक पुल पर रखकर डिफ्लेक्शन मापा गया।

चौथे चरण में ट्रकों को क्रमवार हटाकर परीक्षण किया गया, जबकि पांचवें चरण में कुल डिफ्लेक्शन की रिकवरी मापी गई। विभाग के अनुसार पांचों चरणों में पुल को आईआरसी मानकों के अनुसार 85 प्रतिशत से अधिक रिकवरी प्राप्त हुई, जो यातायात संचालन के लिए सुरक्षित मानी गई।

10 वर्ष तक संवेदक करेगा रखरखाव

सहायक अभियंता महेश चौधरी ने बताया कि लोड टेस्ट के दौरान सभी सहायक एवं कनिष्ठ अभियंताओं की ड्यूटी लगाई गई थी। इनके माध्यम से डिफ्लेक्शन एवं रिकवरी के आंकड़ों का संकलन किया गया। उन्होंने आमजन से यातायात नियमों की पालना करते हुए सुरक्षित आवागमन की अपील की।

उन्होंने बताया कि ब्रिज की डीएलपी अवधि 10 वर्ष रहेगी और इस दौरान रखरखाव की जिम्मेदारी संवेदक की होगी।अनुबंध के अनुसार ब्रिज का परीक्षण थर्ड पार्टी एजेंसी अम्बे टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैब लिमिटेड ने विभागीय अभियंताओं की मौजूदगी में किया।

Updated on:
30 May 2026 01:50 pm
Published on:
30 May 2026 01:50 pm