टोंक

मृदा जांच में हुआ खुलासा, अधिक तापमान से नाइट्रोजन की घट रही मात्रा भूमि को कर रही बंजर

40 डिग्री पार के तापमान से जीवाश्म की मात्रा कम होने के साथ भूमि के लाभकारी जीवाणुओं का मरना शुरू हो जाता है।  
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Jun 18, 2018
soil investigation
टोंक के कृषि विभाग स्थित प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच करते प्रभारी एवं जांच के लिए पड़े मिटटी के नमूने (इनसेट)।

टोंक. जिले का दिनों-दिन बढ़ता तापमान भूमि को बंजर बना रहा है। कृषि विभाग की ओर से तैयार कराए जा रहे मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सॉयल हैल्थ कार्ड) में मिट्टी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है।

विभागीय अधिकारियों का भी मानना है कि 40 डिग्री पार के तापमान से जीवाश्म की मात्रा कम होने के साथ भूमि के लाभकारी जीवाणुओं का मरना शुरू हो जाता है। ऐसे में इसका असर भूमि के उत्पादन भी पडऩे लगा है।


साल दर साल तापमान में हो रही बढ़ोतरी का असर भूमि की उर्वरा शक्ति पर भी पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतम व न्यूनतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस से अधिक का अन्तर नहीं रहना चाहिए।

जबकि पिछले कुछ वर्षों में देखने में आया है कि दिन व रात के तापमान में आधा अन्तर आ गया है। अगर ऐसी ही स्थिति जारी रही तो ग्लोबल वार्मिंग21 वीं सदी में सबसे बड़े खतरे के रूप में सामने आएगा।

नाइट्रोजन की घट रही मात्रा
इन दिनों विभाग की ओर से किसान के प्रत्येक खसरे की मिट्टी की जांच कराई जा रही है। इससे खेत का सम्पूर्ण ब्यौरा किसान की जेब में है।

जांच में सामने आया है कि पांच वर्ष पहले तक जहां भूमि में मुख्य पौषक तत्व नाइट्रोजन की मात्रा का प्रतिशत 0.46 था, वह वर्तमान में घटकर महज 0.44 प्रतिशत रह गई।

इसका कारण कृषि विशेषज्ञ भी तापमान में बढ़ोतरी को मान रहे है। उल्लेखनीय है कि मृदा कार्ड में मिट्टी की जांच, पौषक तत्वों की कमी, अधिकता, कौनसी फसल के लिए मिट्टी उपयुक्त है, तथा इसमें कितने किलो उर्वरक की आवश्यकता है।

यह सब बताने के लिए कृषि विभाग की ओर से खेतों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए है। स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसान यह जान सकेगा कि उसके खेत में किस पौषक तत्व की कमी है।

कौनसे पौषक तत्व की आपूर्ति कर वह फसल का अधिक उत्पादन ले सकता है। मिट्टी का प्रकार कौनसा है। इनके अलावा मृदा स्वास्थ्य की जानकारी, पोषण प्रबन्ध, ऊसर की पहचान, फसलों में चयन आदि की जानकारीभी कार्ड दी गई है।

क्षारीय होने से समस्या बढ़ती है
तेज गर्मी के चलते मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। इससे जीवाश्म ऑरगेनिक मैटर की मात्रा, लाभदायक बैक्टीरिया व पौषक तत्वों की उपलब्धता घट रही है, जिससे फसलो की उपज व गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके साथ ही तापमान बढऩे से भूमि में लवणीयता व क्षारीय होने की समस्या बढ़ जाती है।
डॉ. गुलाबसिंह, मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला प्रभारी टोंक।

Published on:
18 Jun 2018 09:43 am