उदयपुर

40 साल बाद भी शहीद राजेंद्र सिंह के परिवार को वीरता पदक का इंतजार

शहीद की पत्नी श्रीमती वीनू शेखावत ने जीवनभर इस सम्मान के लिए प्रयास किए, उनका 2017 में निधन हो गया। अब पुत्रियां, डॉ. रूचि सिंह और प्राची शेखावत, इस मांग को लेकर प्रयासरत हैं।

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Apr 17, 2026
40 साल पहले अपनी बेटियों के साथ राजेन्द्र सिंह

बेटी रुचि सिंह बोलीं-अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए लड़ती रहेंगी

उदयपुर. राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस पर जहां एक ओर पुलिस कार्मिकों को सम्मानित गया, वहीं 1986 की आतंकी मुठभेड़ में शहीद सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह शेखावत के परिवार का आज भी मरणोपरांत 'राष्ट्रपति पुलिस पदक' का इंतजार खत्म नहीं हुआ। 16 अप्रेल को घटना के 40 वर्ष बाद भी सम्मान की फाइल सरकारी प्रक्रियाओं में उलझी है।

खालिस्तानी आतंकियों से लड़ते हुए शहीद

16 अप्रैल 1986 को सूरजपोल क्षेत्र में गश्त के दौरान सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह शेखावत का सामना खालिस्तानी आतंकवादी सुखविंदर सिंह सुक्खी और हरजिंदर सिंह जिंदा से हुआ। शेखावत ने एक आतंकी से पिस्तौल छीन ली, लेकिन इसी दौरान आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग में वे वीरगति को प्राप्त हुए। इस मुठभेड़ में उनके साथी तत्कालीन पुलिस उप-अधीक्षक रोशनलाल माथुर की भी शहादत दी।

सम्मान की प्रक्रिया और देरी के कारण

दस्तावेजों की बाधा: वर्ष 2012 में पहली बार राजस्थान पुलिस ने उनकी शहादत के सम्मान का प्रस्ताव रखा, पर आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।- पारिवारिक संघर्ष: शहीद की पत्नी श्रीमती वीनू शेखावत ने जीवनभर इस सम्मान के लिए प्रयास किए, उनका 2017 में निधन हो गया। अब पुत्रियां, डॉ. रूचि सिंह और प्राची शेखावत, इस मांग को लेकर प्रयासरत हैं।

प्रशासनिक अनुशंसा

वर्ष 2021-22 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक एम.एल. लाठर ने शेखावत को 'राष्ट्रपति पुलिस पदक' देने की अनुशंसा कर फाइल गृह विभाग को भेजी।वर्तमान स्थिति: अक्टूबर 2022 में उच्च स्तरीय समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजने की मंजूरी दी। हालांकि, परिवार का कहना है कि इसके बावजूद मामला अभी तक केंद्र सरकार तक नहीं पहुंच पाया। 24 जुलाई 2025 को इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ।

सभी समाज पापा को न्याय दिलाने के लिए हमारा साथ दें

शहीद राजेन्द्र सिंह की बड़ी बेटी रुचि ने बताया, हमने कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पापा के बलिदान को आधिकारिक तौर पर सम्मान दिया जाए। 'राष्ट्रपति पुलिस पदक' के लिए केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजी जाए। पिता ड्यूटी के दौरान राष्ट्र के लिए शहीद हुए। सभी समाज आगे आकर उन्हें न्याय दिलाएं स्थानीय स्तर पर उनकी स्मृति में स्मारक की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।

Published on:
17 Apr 2026 05:38 pm
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