
मोहम्मद इलियास/उदयपुर . मुंबई से उदयपुर आते सूरत रेलवे स्टेशन पर दस साल पहले गायब हुए पति के पता नहीं चलने पर पत्नी की ओर से दायर याचिका पर न्यायालय ने उसकी सिविल डेथ घोषित की। आयड़ के कोठारी मोहल्ला निवासी स्नेहलता ने परिवाद में बताया था कि उसका वर्ष 2001 में प्रकाश जैन से विवाह हुआ था। उसके बेटा अक्षय व बेटी मुशिता है। पति मुंबई में भंगार का काम करता था। वह उसके साथ उदयपुर व मुंबई व उदयपुर दोनों ही जगह रहती थी। वर्ष 2009 में पति प्रकाश जेठ गणेशलाल के साथ ट्रेन से उदयपुर आ रहा था। सूरत में रेलवे स्टेशन से वह अचानक लापता हो गया जो अब तक नहीं मिला। उसकी सूरत के महिधरपुरा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई। दस साल तक ढूंढऩे के बावजूद पति का पता नहीं चलने पर पत्नी ने सिविल डेथ का आवेदन लगाया। न्यायालय ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1972 की धारा 108 के तहत प्रकाश जैन की सिविल डेथ घोषित किया। परिवादिया की ओर से पैरवी रजनीश चित्तौड़ा ने की।
यह होती है सिविल डेथ
सामान्य भाषा में सिविल डेथ का अर्थ किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से मृत घोषित करने और उस व्यक्ति के समस्त अधिकार समाप्त होने से होता है। यह अपराध, व्यक्ति के गुम होने सहित विभिन्न परिस्थितियों में हो सकता है। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति सात और उससे ज्यादा वर्षों से गुम होता है तो उसके परिवारजन की ओर से याचिका लगाकर उसे सिविल डेथ घोषित करवाया जा सकता है। माना कि यह याचिका उस गुम हुए व्यक्ति की पत्नी ने लगाई है, तो उसके सिविल डेथ घोषित होने पर उस व्यक्ति के सभी अधिकार समाप्त हो जाते है। पत्नी को सम्पत्ति, दूसरी शादी सहित विभिन्न अधिकार मिल जाते है।