- जोधपुर ले जाकर दे रहे ग्रामीणों को ट्रेनिंग
उदयपुर. जिले के ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने और वन क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से कालका माता नर्सरी में एग्रो-फाॅरेस्ट्री रिसर्च सेंटर खोला जाना था। ढाई वर्ष पूर्व एरिड फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट (आफरी) जोधपुर ने उदयपुर की कालका माता नर्सरी का इसके लिए चयन किया था। लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में उदयपुर के ग्रामीणों की जोधपुर में ट्रेनिंग करवाई जा रही है।
एग्रो फॉरेस्ट्री रिसर्च सेंटर के लिए उदयपुर की कालका माता नर्सरी को चुना गया था। क्योंकि यह नर्सरी काफी बड़ी होने के साथ ही इसमें सरकार की गाइड-लाइन के अनुसार सेंटर बनाने के लिए उचित जगह थी। पूरे देश में ऐसे 20 सेंटर बनाने की योजना थी। कालका माता नर्सरी संभाग में सबसे बड़ी है। इसमें एक साथ 4 लाख पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
सितंबर-2021 में आफरी के निदेशक ने इस नर्सरी का दौरा कर इसे इस योजना के लिए उपर्युक्त बताया था।
यह होना था नर्सरी में
नर्सरी को हाईटेक किया जाना है। जिसमें नई तकनीक से ग्रामीणों को बीज और प्लांट तैयार करना सिखाने की योजना है। लोगों को ट्रेनिंग के साथ एग्रो- फॉरेस्ट्री के फायदा बताए जाएंगे। किसानों को नई किस्म के पेड़ देने के साथ उनकी देखभाल के तरीके बताए जाएंगे। इस योजना के तहत स्थानीय पेड़ों की प्रजातियों पर अधिक फोकस किया जाएगा। किसान पेड़ों को घर के आसपास, खेत की मेड़ और खुले में लगा सकेंगे।
इन पेड़ों पर की जाएगी रिसर्च
सीताफल, आंवला, महुआ, बहेड़ा, अरीठा आदि पेड़ों की वैरायटी पर रिसर्च की जाएगी। यह प्रजाति मेवाड़ अंचल के सभी जिलों में बहुतायत में पाई जाती है। गुजरात में भी ये पेड़ आसानी से मिल जाते हैं।
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क्या है एग्रो-फॉरेस्ट्री
एग्रो-फॉरेस्ट्री भू-उपयोग की एक व्यवस्था (लैंड यूज सिस्टम) है, इसमें कृषि उपज, वन उपज और पशुधन का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाता है। यानी एक ही भूमि पर कृषि व वन उत्पाद की उपज और उसका संरक्षण होता है।
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इंफ्रा डवलप किया जाना है
आफरी वाले ही नर्सरी को हाईटेक कर रहे हैं। गत वर्ष हमें एक लाख रुपए दिए गए थे। इससे कच्ची जगह को पक्का किया गया था। दो बार जोधपुर में ही ट्रेनिंग हुई। वहां ग्रामीणों को भेजा गया था। वर्तमान में नर्सरी डवलप की है। इंफ्रा डवलप किया जाना है।
- मुकेश सैनी, उपवन संरक्षक, दक्षिण।