विश्वविद्यालयों से आमजन तक हर सीसीटीवी जुड़ सकेगा अभय कंट्रोल सेंटर सेएआइ की तीसरी आंख: अब बचना नामुमकिन! हर कैमरा बनेगा पुलिस का साथी, अपराध पर लगेगी रियल-टाइम नजरउदयपुर. राजस्थान में सुरक्षा व्यवस्था नए डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है। अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़ते सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क अब और मजबूत […]
विश्वविद्यालयों से आमजन तक हर सीसीटीवी जुड़ सकेगा अभय कंट्रोल सेंटर सेएआइ की तीसरी आंख: अब बचना नामुमकिन! हर कैमरा बनेगा पुलिस का साथी, अपराध पर लगेगी रियल-टाइम नजर
उदयपुर. राजस्थान में सुरक्षा व्यवस्था नए डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है। अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़ते सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क अब और मजबूत किया जा रहा है। आने वाले समय में इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) जुड़ने के बाद अपराधियों के लिए बच निकलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
सरकार की इस हाईटेक पहल से अब तक एक माह में 12 हजार से ज्यादा कैमरे राज्यभर में जोड़े जा चुके हैं। इसमें विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और कुछ निजी संस्थान शामिल हैं, जबकि कई कॉलेजों में अभी सर्वे का काम तेजी से चल रहा है। राज्य से आए आदेश के बाद सभी कॉलेज को सीसीटीवी से हाइटेक किया जा रहा है। मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय ने संबद्ध समस्त जिले के महाविद्यालयों को कैमरा लगाकर अभय कमांड से जोड़ने के निर्देश दिए। इस प्रक्रिया में सभी महाविद्यालय अपने अपने खर्चे पर यह कैमरा लगवाएंगे।---
परीक्षा केंद्र भी होंगे हाईटेक और पारदर्शी
विश्वविद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, उन्हीं को परीक्षा केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि नकल और गड़बड़ी पर पूरी तरह रोक लगे। परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे, स्ट्रॉन्ग रूम और पेपर सुरक्षा मजबूत हो। अब महाविद्यालयों को भी तेजी से इस सिस्टम से जोड़ा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में हर कॉलेज डिजिटल निगरानी में होगा। इससे कैंपस की हर संवेदनशील गतिविधि पर नजर रहेगी, किसी भी घटना पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। शिक्षा संस्थान पूरी तरह सुरक्षित डिजिटल निगरानी में होंगे।
पहले विश्वविद्यालय, फिर आमजन, पूरे राज्य में विस्तार
राजस्थान पुलिस की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों और उनके अधीन महाविद्यालयों के सीसीटीवी कैमरे अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़े जाएंगे। इसके बाद यह सुविधा निजी संस्थानों, दुकानों और आम नागरिकों तक बढ़ाई जाएगी। यानी अब सुरक्षा केवल सरकारी दायरे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जन-जन की भागीदारी से मजबूत होगी।--आमजन भी ऐसे जुड़ सकेंगे अभय सेराजकॉप सिटीजन ऐप के माध्यम से कैमरा कंसेंट विकल्प चुनें। अपने सीसीटीवी सिस्टम का विवरण साझा कर सहमति देकर कैमरे को जोड़ सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगेगा।--एआइ से बदलेगा खेल, अपराधी कहीं भी छिपे, पकड़ा जाएगाइस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण है, एआइ तकनीक है। जैसे ही किसी अपराधी की मामूली पहचान सिस्टम में दर्ज होगी, वह किसी भी जुड़े कैमरे में दिखते ही ट्रैक हो जाएगा। अलग-अलग जगहों के फुटेज को जोड़कर उसकी लोकेशन मिल जाएगी। पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकेगी--
अभय सिस्टम की खासियत
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग
- पूरे राज्य में नेटवर्क कनेक्टिविटी
- बिना अतिरिक्त खर्च के इंटीग्रेशन
- मोबाइल ऐप से आसान कनेक्शन
- अपराध नियंत्रण में त्वरित प्रतिक्रिया
यह कदम होगा गेम-चेंजर?
- अपराधियों पर हर समय नजर
- घटनाओं पर तुरंत पुलिस एक्शन
- नागरिकों की सीधी भागीदारी
- स्मार्ट सिटी की दिशा में बड़ा कदम
अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए हम सुरक्षा को तकनीकी रूप से और मजबूत बना रहे हैं। इसमें जनभागीदारी सबसे अहम है। जब आमजन के कैमरे भी पुलिस नेटवर्क से जुड़ेंगे, तो यह एक तरह का ‘डिजिटल सुरक्षा जाल’ बन जाएगा, जिसमें अपराधियों के बचने की गुंजाइश बेहद कम होगी।
अजय पाल लाम्बा, महानिरीक्षक पुलिस, स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो, राजस्थान
राजस्थान में शुरू हुई यह पहल केवल एक तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का मॉडल है। विश्वविद्यालयों से शुरू होकर आमजन तक पहुंचने वाला यह नेटवर्क आने वाले समय में राज्य को देश के सबसे सुरक्षित राज्यों में शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
प्रो.बी.पी.सारस्वत, कुलपति सुविवि