पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेता दिनेश खोड़निया के डबोक स्थित दफ्तर पर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) उदयपुर की टीम ने कार्रवाई की।
उदयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेता दिनेश खोड़निया के डबोक स्थित दफ्तर पर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) उदयपुर की टीम ने कार्रवाई की। गुरुवार को पहुंची टीम ने देर रात तक कार्रवाई जारी रखी। हालांकि कार्रवाई को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया।
सीजीएसटी की टीम केआरई अरिहंत नामक फर्म के दफ्तर पहुंची थी, जिसके संचालक दिनेश खोड़निया के बेटे आदिश खोड़निया करते हैं। टीम ने सर्च के दौरान कार्मिकों से पूछताछ करते हुए दस्तावेज जब्त किए हैं। विभागीय सूत्रों ने बताया कि सर्च की कार्रवाई पूरी की है और जब्त दस्तावेजों की जांच की जा रही है। टीम की ओर से कार्रवाई की वीडियोग्राफी करते हुए अहम सबूत अपने कब्जे में लिए है। कार्रवाई में सीजीएसटी हिरणमगरी उदयपुर टीम के अधिकारी शामिल थे।
दिनेश खोडनिया अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं, वहीं डूंगरपुर के कांग्रेस जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उनके भाई नरेंद्र खोड़निया सागवाड़ा नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं। खोड़निया का ज्वेलरी और रियल एस्टेट संबंधी बड़ा कारोबार है। डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा और उदयपुर सहित कई जगह उनका कारोबार है। एयरपोर्ट के पास उनकी बड़ी जमीन भी है।
इससे पहले ईडी ने 13 अक्टूबर 2023 को डूंगरपुर के सागवाड़ा में खोड़निया के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी की टीम ने जब सागवाड़ा स्थित ऑफिस पर छापा मारा था, उस समय प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी। कांग्रेस ने उस समय की कार्रवाई को चुनावी स्टंट बताया था। गौरतलब है कि खोड़निया ने विधानसभा चुनाव में उदयपुर से टिकट की दावेदारी भी की थी।
उदयपुर में दिसम्बर 2022 में हुए पेपर लीक केस में आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा आरोपी है और केस की जांच अब भी जारी है। जांच के दौरान कांग्रेस नेता खोड़निया सहित कई कांग्रेस नेताओं का नाम भी बाबूलाल कटारा से जोड़ा गया था। इसी को लेकर ईडी ने उनके ऑफिस में तलाशी ली थी। हालांकि खोड़निया ने आरोपों को निराधार बताया था।
कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया ने कहा कि जहां टीम पहुंची, वहां फर्म खोले डेढ़ साल ही हुआ है और निर्माण कार्य चल रहा है। टीम ने जो जानकारी मांगी, वह सब हमने उपलब्ध करा दी। टीम ने तीन-चार घंटे तक छानबीन की। इससे पहले भी मेरे यहां ईडी और जीएसटी की टीमें भेजी जा चुकी है, लेकिन कुछ नहीं मिला। इसके बावजूद बार-बार टीमें भेजने का काम राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है।