Rave Party Raid Case | रेव पार्टी पर हुई पुलिसिया कार्रवाई अब खुद पुलिस के लिए गले की फांस बन गई है। होटल संचालक द्वारा 2 लाख रुपए की अवैध वसूली और झूठे केस के आरोपों के बाद डीजीपी विजिलेंस की जांच से पूरे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। मामला उदयपुर के गोगुन्दा क्षेत्र का है, जहां एक हेरिटेज रिसोर्ट पर 16 दिसंबर को हुई 'रेव पार्टी' की रेड अब पुलिस के लिए ही 'आफत' बन गई है। होटल संचालक ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे डीजीपी (Director General of Police) से शिकायत की थी कि पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर न केवल डराया-धमकाया, बल्कि लाखों रुपए की अवैध वसूली भी की। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी कार्यालय ने विजिलेंस (सतर्कता) टीम को जांच के लिए गोगुन्दा भेजा है, जिससे पूरे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
डीजीपी कार्यालय के उपअधीक्षक (सतर्कता) श्रीराम बडसरा ने मंगलवार को गोगुन्दा पहुँचकर जांच की कमान संभाली। उन्होंने उन सभी 11 पुलिसकर्मियों को तलब किया जो 16 दिसंबर की उस कथित कार्रवाई में शामिल थे।
होटल 'इन्द्रप्रस्थ हेरिटेज रिसोर्ट' के संचालक मूलाराम मेघवाल ने डीजीपी को भेजी अपनी शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:
झूठा केस और धमकी: संचालक का आरोप है कि 16 दिसंबर की रात जब गेस्ट रिसोर्ट में रुके हुए थे, तब पुलिस ने अचानक रेड डाली और गेस्ट के साथ अनैतिक संबंधों का झूठा आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
2 लाख की डील: शिकायत के अनुसार, डीएसपी गोपाल चंदेल और सिपाही भीमसिंह मीणा ने होटल मालिक को डराकर 2 लाख रुपए की मांग की। होटल मालिक के कहने पर संचालक ने यह राशि सिपाही को सौंप दी, जिसके बाद 7 लोगों को मौके से छोड़ दिया गया।
रिकॉर्ड बनाम रेड: संचालक का दावा है कि सभी गेस्ट्स का रिकॉर्ड होटल रजिस्टर में दर्ज था, लेकिन पुलिस ने 'रेव पार्टी' का हाई-प्रोफाइल नाम देकर अवैध वसूली का खेल खेला।
विजिलेंस टीम ने जिन पुलिसकर्मियों को बयान के लिए पाबंद किया है, उनकी सूची काफी लंबी है। इसमें शामिल हैं:
इस जांच के बाद अब गेंद डीजीपी कार्यालय के पाले में है। यदि विजिलेंस टीम को वसूली के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो इन 11 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरना तय है। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार का है, बल्कि पुलिस की उस छवि पर भी प्रहार है जो वह 'अपराध मुक्त राजस्थान' के नाम पर पेश करती है। क्या यह वाकई एक रेव पार्टी थी या पुलिस की 'पॉकेट मनी' बनाने का एक जरिया? इसका खुलासा विजिलेंस की अंतिम रिपोर्ट में होगा।