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राजस्थान जूनियर पावरलिफ्टिंग में उदयपुर का शानदार प्रदर्शन, 6 पदक जीते, रूपेश ने बनाए 3 राज्य कीर्तिमान

Rajasthan News: सब-जूनियर 59 किलोग्राम वर्ग में रूपेश बरांडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 507.5 किलोग्राम वजन उठाया और 3 नए राज्य रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता।

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खिलाड़ियों की फोटो: पत्रिका

Power-lifting Championship 2026: बीकानेर में आयोजित 45वीं राजस्थान राज्य जूनियर और 23वीं राज्य सब-जूनियर इक्विप्ड पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में उदयपुर के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। टीम ने कुल 6 पदक अपने नाम किए, जिसमें 3 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक शामिल हैं।

बनाए 3 राज्य कीर्तिमान

सब-जूनियर 59 किलोग्राम वर्ग में रूपेश बरांडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 507.5 किलोग्राम वजन उठाया और 3 नए राज्य रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा रूपेश ने जूनियर वर्ग में भी रजत पदक जीतकर कुल 2 पदक अपने नाम किए।

जूनियर वर्ग में जयेश कामोया ने जीता स्वर्ण पदक

74 किलोग्राम जूनियर वर्ग में जयेश कामोया ने स्वर्ण पदक (625 किलोग्राम) जीता, जबकि 74 किलोग्राम मास्टर-2 वर्ग में सोहनलाल नलवाया ने भी स्वर्ण पदक प्राप्त किया। 43 किलोग्राम जूनियर महिला वर्ग में मानसी रावत ने 265 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। वहीं 47 किलोग्राम सब-जूनियर महिला वर्ग में हंसिका कामोया ने कांस्य पदक हासिल किया।

टीम के अन्य सदस्य युवराज सिंह और मितांशु सेन का भी प्रदर्शन सराहनीय रहा, उन्होंने अपनी जबरदस्त मेहनत से प्रतियोगिता में भाग लिया। टीम के कोच अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गौरव साहू रहे, जिनकी मार्गदर्शन में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। वहीं, महिला टीम की कोच राष्ट्रीय चैंपियन नीलम डांगी रही।

100% अंक लाने वाले लक्षित परमार का किया सम्मान

वहीं उदयपुर में सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर स्थिति के बावजूद राजस्थान बोर्ड की 10वीं कक्षा में (दिव्यांग श्रेणी) में 100 प्रतिशत अंक लाने वाले लक्षित परमार का मंगलवार को सम्मान किया गया।

अर्थ डायग्नोस्टिक सेंटर में आयोजित सम्मान समारोह में पेनेशिआ डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के अध्यक्ष डॉ अरविंदर सिंह ने परिजनों की मौजूदगी में लक्षित का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि लक्षित जैसे मेधावी छात्र समाज की सोच बदलने की ताकत रखते हैं।

इस मौके पर पिता दिनेश परमार ने कहा कि लक्षित अपने हाथ-पैर से काम नहीं कर सकता था। गोद में उठाकर स्कूल ले जाना पड़ता था। वह अपना नाम भी खुद नहीं लिख पाता, जिसके लिए बोर्ड परीक्षा में उसे 'राइटर' की मदद लेनी पड़ी। उसकी इच्छाशक्ति इतनी प्रबल है कि वह रोज 3-4 घंटे पढ़ाई करता। उसे एटॉमिक हैबिट्स जैसी प्रेरणादायक किताबें पढ़ने का शौक है। लक्षित सिविल सर्विसेज की तैयारी कर देश की सेवा करना चाहता है।