
थानाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग
चारभुजा. आस्था के प्रमुख केंद्र चारभुजा मंदिर क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पार्किंग संचालन और शुल्क वसूली को लेकर संपूर्ण पुजारी समाज, चारभुजा मंदिर मंडल एवं ट्रस्टीगण एकजुट होकर सामने आए और विरोध दर्ज कराया। प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय थाना अधिकारी लक्ष्मण सिंह को ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन में मंदिर मंडल एवं ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट कहा गया कि चारभुजा मंदिर मंडल ने मंदिर क्षेत्र की पार्किंग व्यवस्था किसी ठेकेदार अथवा अन्य संस्था को ठेके पर देने के लिए न तो कोई एनओसी जारी की है और न ही लिखित सहमति दी है। ऐसे में मंदिर मंडल की स्वीकृति के बिना पार्किंग संचालन अथवा श्रद्धालुओं से शुल्क वसूली किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई गई।
शुल्क वसूली रोकने की मांग
मंदिर मंडल एवं ट्रस्टियों ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति पार्किंग व्यवस्था लागू करना अनुचित है और इससे मंदिर की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की भावनाओं तथा क्षेत्र की शांति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि विधिवत सहमति एवं स्वीकृति के बिना पार्किंग संचालन और शुल्क वसूली को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
Bपुजारी बोले: नियमों के विपरीत पार्किंगB
ज्ञापन में प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमों के विपरीत पार्किंग संचालन या शुल्क वसूली पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा, दबाव या अनावश्यक वसूली का सामना नहीं करना चाहिए। मंदिर क्षेत्र की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, मर्यादा और श्रद्धालु हित सर्वोच्च होना चाहिए। इस अवसर पर मंदिर ट्रस्टी नाथूलाल बगड़वाल, किशनलाल भंडारी, लालाराम भंडारी, रूपलाल चौहान भंडारी, देवीलाल चोवटिया, भंवरलाल वगड़वाल, जयदीश पंचोली, दिनेश वीरावत, गोपाल चोवटिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, पुजारी समाज के प्रतिनिधि एवं मंदिर मंडल के ट्रस्टीगण उपस्थित रहे।
Bटेंडरधारी ने आरोपों को बताया भ्रामकB
दूसरी ओर, टेंडरधारी ललित गुर्जर ने बताया कि देवस्थान विभाग द्वारा निर्धारित नियमों एवं टेंडर प्रक्रिया के तहत उनके नाम टेंडर खुला है। इसके अनुसार ही विधिवत रसीद काटकर पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पुजारी समाज की ओर से भी टेंडर भरा गया था, लेकिन टेंडर उनके नाम नहीं खुलने के कारण नाराजगीवश इस तरह का भ्रम फैलाया जा रहा है।