उदयपुर

डिवीडिंग मशीन की जानकारी ‘लोकहित में नहीं’, नगर निगम ने दो आरटीआई आवेदन खारिज किए

Mar 26, 2026
आरटीआई लगाने वालों को कई बार गोलमोल जवाब दिए जाते हैं। किसी कार्य या खर्च की जानकारी मांगने पर विस्तृत जानकारी नहीं दी जाती। इसके बाद जब सवाल खड़े होते हैं तो छिपाई हुई जानकारियों में से बचाव का रास्ता निकाला जाता है।
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खर्च और भुगतान से जुड़ी जानकारी देने से किया इनकार, सूचना के अधिकार पर उठे सवाल- नगर निगम की पारदर्शिता पर खड़े हुए सवाल

उदयपुर. नगर निगम द्वारा झीलों की सफाई में उपयोग हो रही डिवीडिंग मशीन के संचालन और रखरखाव पर हुए खर्च की जानकारी को “लोकहित में नहीं” बताते हुए देने से इनकार कर दिया गया है। इस फैसले ने न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर भी बहस छेड़ दी है।झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने 5 जनवरी, 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन कर जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक नई डिवीडिंग मशीन के संचालन और मेंटनेंस पर हुए कुल खर्च की जानकारी मांगी थी। करीब तीन माह बाद 23 मार्च को निगम की ओर से जवाब मिला कि यह जानकारी “सृजनात्मक एवं व्यापक लोकहित में नहीं” होने के कारण उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। पालीवाल को एक ही तरह की भाषा में दो अलग-अलग पत्रों के माध्यम से यही जवाब दिया गया।---------

पहले दी, अब क्यों रोकी?

पालीवाल का कहना है कि इससे पहले निगम ने पुरानी डिवीडिंग मशीन के संचालन और रखरखाव से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई थी, जिसमें हर वर्ष लाखों रुपए खर्च होने का उल्लेख था। ऐसे में नई मशीन के खर्च को गोपनीय बताना समझ से परे हैं।--------

“क्या एटमी पावर से चल रही मशीन?”

पालीवाल ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर नई डिवीडिंग मशीन में ऐसी कौन सी तकनीक है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक होने से गोपनीयता भंग हो जाएगी। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या यह मशीन “एटमी पावर” से संचालित हो रही है, जो इसकी जानकारी लोकहित में नहीं मानी जा रही।

जनता के पैसे का हिसाब जरूरी

उन्होंने कहा कि जब झीलों की सफाई पर खर्च जनता के पैसे से हो रहा है, तो आम नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि खर्च कितना हो रहा है और कहीं यह जरूरत से ज्यादा तो नहीं।

कई बार दिए गोलमोल जवाब

आरटीआई लगाने वालों को कई बार गोलमोल जवाब दिए जाते हैं। किसी कार्य या खर्च की जानकारी मांगने पर विस्तृत जानकारी नहीं दी जाती। इसके बाद जब सवाल खड़े होते हैं तो छिपाई हुई जानकारियों में से बचाव का रास्ता निकाला जाता है।

Updated on:
26 Mar 2026 08:04 pm
Published on:
26 Mar 2026 08:04 pm