उदयपुर

Diwali V/S Pollution: उदयपुर में इस दिवाली होगी ध्वनि और वायु प्रदूषण की मॉनिटरिंग, RPCB रखेगी पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर नजर

उदयपुर. राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरपीसीबी) इस बार दीपावली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण की मॉनिटरिंग करेगा।
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Oct 05, 2017
Diwali VS Pollution: 2017 diwali RPCB monitoring noise air pollution

उदयपुर . राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरपीसीबी) इस बार दीपावली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण की मॉनिटरिंग करेगा। विभाग के नॉइस मीटर दीपावली के दिन ध्वनि प्रदूषण और सीएएक्यूएमएस यंत्र पटाखों से हवा में बढ़ी जहरीली गैसों का स्तर मापेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार रात के समय 35 और दिन में 45 डेसीबल से अधिक शोर नहीं होना चाहिए। आरपीसीबी द्वारा बड़े शहरों में पटाखों से होने वाली ध्वनि प्रदूषण की स्थिति का जायजा लेने के लिए तीन स्थानों पर नॉइस मीटर लगाए जाएंगे।

एक यंत्र साइलेंट जोन यानी अस्पताल क्षेत्र में, दूसरा व्यावासायिक यानी बाजार और तीसरा यंत्र आवासीय क्षेत्र में लगाया जाएगा। इनकी रिपोर्ट बताएगी कि दीपावली पर कितना वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ा। आंकड़ों की रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भेजी जाएगी।


शोर से सेहत पर असर यह
ध्वनि प्रदूषण से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मानसिक तनाव, पेट में अल्सर, दमा, अस्थमा, अचानक तेज आवाज से किसी महिला के गर्भपात तक हो सकता है। पटाखों के शोर से शिशु और बच्चों की श्रवण क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। पटाखों से निकले जहरीले धुंए से कई प्रकार के नेत्र रोग हो सकते हैं।

100 अधिक एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए खराब

हवा की गुणवत्ता 100 एक्यूआई तक ही स्वास्थ्य के लिए सही रहती है। 100 से अधिक एक्यूआई स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालती है। कोटा , अलवर, जयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर के कई क्षेत्रों में सामान्य दिनों में ही हवा का एक्यूआई स्तर 200 को पार करने लगा है। दीपावली के दिन कई शहरों में हवा का स्तर 300 एक्यूआई तक पहुंच जाता है।

300 से 400 एक्यूआई हवा का स्तर स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए घातक माना जाता है। आपीसीबी द्वारा जयपुर, उदयपुर, जोधपुर , बीकानेर , कोटा, अलवर में लगाए गए सीएएक्यूएमएस दीपावली के दिन हवा की एक्यूआई कितनी रही तय करेंगी। बीते साल दीपावली पर पटाखों के धुएं ने दिल्ली की हवा को जहरीला बना दिया था।

पर्यावरण की रक्षा करना सबका नैतिक दायित्व है। पटाखों का अधिक उपयोग नहीं करें, इससे ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ता है। आरपीसीबी दीपावली के दिन नॉइस मीटर्स और सीएएक्यूएमएस के जरिए ध्वानि और वायु प्रदूषण की मॉनिटरिंग करेगा।
डॉ. बी.आर. पंवार, क्षेत्रीय अधिकारी, आरपीसीबी, उदयपुर

Published on:
05 Oct 2017 12:55 pm