
उदयपुर. विद्युत निगम में भारी अंधेरगर्दी चल रही है। जहां 3 किलोमीटर की लाइन से काम चल रहा है, वहां 18 किलोमीटर दूर से लाइन खींची जा रही है। इसकी शिकायत मिलने पर उच्चाधिकारियों को लगने पर उन्होंने काम बंद करवाया, लेकिन दूसरे ही दिन फिर काम शुरू कर दिया। इस संबंध में अधिकारी अनभिज्ञता जता रहे हैं। जबकि फिल्ड में होने वाले कार्य पर उनकी पूरी निगाह होनी चाहिए।जानकारी के अनुसार सराड़ा में बिजली की मांग को देखते हुए करीब 3 वर्ष पूर्व परसाद से 33 केवी की लाइन लाने का प्रस्ताव बनाया गया। यह प्रस्ताव अपनी गति से चल रहा था। इसी दौरान करीब छह माह पूर्व सराड़ा से करीब 3 किलोमीटर दूर मौजूद कछोटा गांव में 132 केवी जीएसएस स्वीकृत हुआ और इसका काम भी शुरू हो गया। इसके बाद पुरानी लाइन के प्रस्ताव में भी तेजी लाई गई और इसकी स्वीकृति जारी कर दी गई। गत दिनों परसाद में 33 केवी लाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हुआ। ग्रामीणों की इसकी भनक लगी तो उन्होंने इसका विरोध किया और उच्चाधिकारियों को शिकायत की। इस पर दो दिन पूर्व मुख्य अभियंता ने इस कार्य को बंद करने के निर्देश दिए। इस पर ठेकेदार ने एक बार काम बंद करने के बाद सोमवार को पुन: शुरू कर दिया।
निगम को 1.30 करोड़ का नुकसान
मामले को लेकर विद्युत निगम के संगठन के पदाधिकारी मंगलवार को अधीक्षण अभियंता
कार्यालय पहुंचे। पदाधिकारियों ने परसाद से सराड़ा तक 18 किलोमीटर की लाइन को सरकारी धन का दुरुपयोग बताया। उन्होंने कहा कि सराड़ा में जीएसएस शुरू होने के साथ ही यह लाइन किसी काम की नहीं रहेगी। इस अवसर पर भारतीय मजदूर संघ जिला मंत्री प्रतीकसिंह राणावत, राजस्थान विद्युत मजदूर महासंघ महामंत्री विजयसिंह बाघेला, डिस्कॉम कार्यकारी अध्यक्ष भरत किशोर सुहालका, जिला संगठन मंत्री लालसिंह पंवार, व्रत उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सहित कई सदस्य
मौजूद थे।