
उदयपुर: जिस मासूम ने अभी दुनिया में ठीक से आंखें भी नहीं खोलीं, उसकी बीमारी की जांच के लिए परिजनों को सात महीने से ज्यादा इंतजार करने को कहा गया है। परिजनों ने शुक्रवार को आवेदन किया था। जन्म से एक किडनी नहीं होने और एक पैर छोटा होने की समस्या से जूझ रहे चार महीने के बच्चे की एमआरआई के लिए एमबी अस्पताल में मई 2027 की तारीख मिली है। परिवार के सामने अब दो ही रास्ते हैं, बच्चे की जांच के लिए महीनों इंतजार करे या आर्थिक मुश्किलों के बावजूद निजी सेंटर पर पैसे खर्च करे। निशुल्क जांच की सुविधा के बीच एक मशीन और लंबी वेटिंग ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है।
एमबी अस्पताल में उदयपुर के अलावा आसपास के शहरों और गांवों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। निशुल्क एमआरआई जांच की सुविधा के कारण बड़ी संख्या में मरीज इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। लेकिन रेडियोलॉजी विभाग में एक ही मशीन होने से जांच की उपलब्धता सीमित है। मरीजों की बढ़ती जरूरतों के मुकाबले व्यवस्था का विस्तार नहीं होने से वेटिंग लंबी हो रही है। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें आगे के उपचार के लिए जांच रिपोर्ट की जरूरत है।
उदयपुर के एमबी अस्पताल में एमआरआई जांच की लंबी वेटिंग के चलते कई मरीज बाहर निजी सेंटरों पर जांच कराने को मजबूर हैं। सरकारी अस्पताल में निशुल्क जांच की सुविधा के बावजूद महीनों बाद की तारीख मिलने से मरीजों के पास इंतजार करने या अपनी जेब से पैसे खर्च कर निजी सेंटर पर जांच कराने का विकल्प बचता है।
एमबी अस्पताल में एमआरआई जांच के लिए बढ़ती वेटिंग को देखते हुए रेडियोलॉजी विभाग में दूसरी मशीन लगाने की जरूरत है। वर्तमान में एक ही मशीन पर संभागभर से आने वाले मरीजों की जांच का भार है। ऐसे में मरीजों की संख्या के मुकाबले जांच सुविधा बढ़ाना जरूरी है। दूसरी मशीन लगने से वेटिंग कम होगी।