
शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर कविता गांव के पीछे की पहाडि़यां शनिवार दोपहर से धधकने लगी। देखते ही देखते यह आग 400 हैक्टेयर क्षेत्र में फैल गई। वहीं कोडियात की पहाड़ी भी भभकी। यहां करीब 50 हैक्टेयर में आग लगी। इसकी सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और देर रात तक आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। गनीमत रही कि यह आग आबादी क्षेत्र से दूर लगी।
क्षेत्रीय वन अधिकारी सुरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि दोपहर करीब 2 बजे कविता गांव के पीछे की पहाडि़यों पर आग की सूचना मिली। इस पर टीम को मौके पर भेजा गया। आसपास के नाकों के साथ ही वन विभाग के करीब 40 लोगों की टीम ने आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। पहाडि़यों पर सूखी घास के साथ पतझड़ के कारण पत्ते होने और लगातार हवा चलने के कारण देखते ही देखते तेजी से फैलने लगी। ऐसे में आग पर काबू पाने में परेशानी हुई। उन्होंने बताया कि यह आग 300 से 400 हैक्टेयर में फैली है। इसका सही अंदाजा रविवार सुबह ही लग पाएगा। काेडियात की पहाडि़यों में लगी आग पर काबू पा लिया गया।सरिसृप को नुकसान का अनुमान
पहाडि़यों पर लगी आग ग्राउंड लेवल पर घास में ही लगी, ऐसे में सरिसृप वर्ग के जीवों को नुकसान होने की संभावना है। क्योंकि रेंगने वाले जीव अधिक दूरी तक नहीं भाग पाते और आग की चपेट में आने से मर जाते हैं।बुझाने में इसलिए आती है परेशानी
पहाडि़यों पर आग लगने पर इसे बुझाने में काफी परेशानी होती है। क्योंकि पहाडियों पर आग बुझाने के संसाधन मौजूद नहीं है। ऐसे में वनकर्मी इसे पारंपरिक तरीके से ही बुझाते हैं। इनमें झाडि़यों से पीटकर, दूसरी ओर से आग जलाकर सेफ जोन तैयार किया जाता है। इससे आग बुझाने में समय लगता है।