
उदयपुर. जिले में इंटीग्रेटेड वाटरशेड डवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत वॉटर इकनॉमिक $जोन के प्रथम चरण को पूरा कार्य डीएस (धर्मपाल सत्यपाल) गु्रप की ओर से पूरा किया गया है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य जल संरक्षण और हार्वेस्टिंग को प्राथमिता देते हुए। क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में सुधार करना था, जिसमें विशेष महत्व इस अद्र्धशुष्क क्षेत्र में जल संरक्षण और जल संचयन को दिया गया था।
यह वॉटर इकनॉमिक जा$ेन उदयपुर के कुराबड़ और असलीगढ़ के लगभग 10हजार हैक्टेयर क्षेत्र में फैला है।लक्ष्य मार्च 2021 तक 19 गांवों के 22 हजार से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच का विस्तार करना है। पहले चरण में इस प्रोजेक्ट को 2607 हैक्टेयर में लागू किया जा चुका है, जो 1315 हैक्टेयर अलसीगढ़ और 1292 हैक्टेयर कुराबड़ में स्थित है। इसके तहत विविध वॉटर रिर्सोस डवलपमेंट स्ट्रक्चर, जैसे 11 एनिकट या चैक डेम, 35 मिनी परकोलेशन टैंक्स या अर्दन डैम्स और साथ ही विभिन्न स्ट्रक्चर जैसे कंटिन्यूस कंटूर ट्रेंचेस, 18664 क्यूबिक मीटर, गैबिन, गली प्लग्स रिचार्ज पिट्स आदि का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त 4 चैक डैम्स और 1 सामुदायिक तालाब का पुर्नद्धार किया गया। इन निर्माणों में जल संग्रह और रिर्चाज की क्षमता लगभग 2,74,507 क्यूबिक मीटर है।
जल संरक्षण, डीएस गु्रप के सीएसआर का मुख्य आधार है। यह प्रयास जल की कमी वाले क्षेत्रों में जल सुरक्षा में सुधार को लेकर दृढ़ संकल्पित है। राजस्थान में जल संरक्षण परियोजनाओं की स्थापना, कृषि के लिए जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए, क्षेत्रों की जल तालिका में सुधार करने के लिए की गई है । इससे समुदाय के जीविकोपार्जन संभावनाओं में भी वृद्धि होगी।
डूंगरपुर के सुराता में इंटिग्रेटेड कम्यूनिटी डेवलपमेंट प्रोजक्ट का संचालन किया जा रहा है, जिससे गांव के नियमित विकास को बनाए रखने के लिए स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया जा रहा है। जीवन के विविध क्षेत्रों जैसेए सीखने के विविध आयामों में सुधार, स्कूल जाने वाले बच्चों के स्तर और उनमें पाई जाने वाली कमियों में सुधार, स्कूलों के संसाधनों में सुधार और क्रिएटिव अड्डा नामक प्रयास जारी हैं। झालावाड़ में धनिया प्रोजेक्टस के जरिए किसानों के जीविकोपार्जन व आय में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं।