उदयपुर

उदयपुर: इस वजह से बैरंग लौटे पुस्तकें लेने पहुंचे 100 शिक्षक, अधिकारी एक दूसरे को बताते रहे दोषी

उदयपुर . जिलेभर से आए शिक्षक करीब चार घंटे तक मंडल कार्यालय में जमे रहे, लेकिन उन्हें पुस्तकें नहीं दी गई।
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Jun 23, 2018
Free book distribution scheme in udaipur block
उदयपुर: इस वजह से बैरंग लौटे पुस्तकें लेने पहुंचे 100 शिक्षक, अधिकारी एक दूसरे को बताते रहे दोषी

उदयपुर . जिले के चार ब्लॉक के करीब 100 शिक्षक शुक्रवार को पाठ्यपुस्तक मंडल में शेष रही पहली से आठवीं कक्षा तक की पुस्तकें लेने पहुंचे, लेकिन मंडल और डीईओ कार्यालय ने उन्हें पुस्तक वितरण कार्यक्रम स्थगित होने की बात कहकर बैरंग लौटा दिया।


जिलेभर से आए शिक्षक करीब चार घंटे तक मंडल कार्यालय में जमे रहे, लेकिन उन्हें पुस्तकें नहीं दी गई। अधिकारियों का तर्क था कि पहले इस वितरण कार्यक्रम को रोकने की सूचना मेल से बीईईओ को दे दी गई थी। हालांकि इन शिक्षकों तक यह सूचना नहीं पहुंची। ऐसे में उन्हें बेकार में उदयपुर तक की दौड़ लगाकर किराया और समय बेकार करना पड़ा।


पहली से आठवीं तक की अधिकतर पुस्तकें 4 से 14 जून तक बांट दी गई, लेकिन कक्षा तीन की पर्यावरण, पहली की हिन्दी, पांचवीं की गणित और हिन्दी की पुस्तकें नहीं पहुंची थी, इसलिए इसे दूसरे फेज में देने का निर्णय किया गया था, लेकिन बीईईओ ने समय पर शिक्षकों को सूचना नहीं दी।


यह है नि:शुल्क पुस्तक वितरण योजना
पहली से आठवीं से प्रत्येक बच्चे को पाठ्यपुस्तक मंडल की ओर से नि:शुल्क पुस्तक वितरण योजना के तहत नि:शुल्क किताबें दी जाती है। पहली से तीसरी तक 100 प्रतिशत बच्चों को नई किताबें और चौथी से आठवीं तक 50 प्रतिशत नई और 50 प्रतिशत पुरानी पुस्तकें देने का प्रावधान है।


प्रवेशोत्सव से पहले पहुंचनी थी पुस्तकें
ये पुस्तकें 19 जून यानी प्रवेशोत्सव से पहले स्कूलों में पहुंचनी थी, लेकिन अधिकतर स्कूलों में ये नहीं पहुंच पाई। कोटड़ा के 28 नोडल केन्द्र पुस्तकें नहीं लेकर गए। झाड़ोल, फलासिया और उदयपुर शहर में चौथी, छठीं और आठवीं कक्षा की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। ऐसे में अब बच्चों को नई पुस्तकें आने पर ही वितरित हो पाएंगी।


ये चार ब्लॉक थे शामिल
खेरवाड़ा, ऋषभदेव, सराड़ा और सेमारी के करीब 100 शिक्षकों को सुबह पाठ्यपुस्तक मंडल पहुंचे थे। पुराने आदेश के अनुसार 22 जून को वितरण होना था, लेकिन इसे पाठ्य पुस्तक मंडल ने स्थगित कर दिया था।

समय पर पुस्तक वितरण की सूचना दी जाए। स्कूलों तक पुस्तकें पहुंचाने में करोड़ों रुपए खर्च होता है, इसलिए इसे सीधे ही स्कूल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
शेरसिंह चौहान, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पंचायत राज कर्मचारी संघ

पहले तय प्रोग्राम में बदलाव की जानकारी डीईओ को दे दी गई थी, लेकिन शायद शिक्षकों को डीईओ की ओर से सूचना नहीं दी गई होगी, इसमें हमारी गलती नहीं है।
अरविन्द गुप्ता, मैनेजर पाठ्यपुस्तक मंडल उदयपुर

Published on:
23 Jun 2018 11:22 am