उदयपुर

गोल्ड लोन रूला रहा गरीबों को, उधर कंपनियां हो रही मालामाल

कोर्ट में पहुंच रहे कई मामले, आरबीआई तक को लिखा  
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thiefs take gold loan from finance companies
चोरी की ज्वैलरी पर ऋण उठाकर मौज उड़ा रहे हैं।

उदयपुर. गरीब व कमजोर वर्ग का व्यक्ति अगर मजबूरीवश अपनी मां-बहन, बेटी व पत्नी के सोने के जेवर गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेता है तो गारंटी नहीं कि कंपनी वहीं जेवर उनको लौटा देगी। कंपनी ऋण में छोटी-छोटी कमियों को निकालकर आपको ऐसा रुलाएगी कि आप या जेवर छोड़ दोगे या ब्याज में पूरा सोना जमा हो जाएगा। हां, मानवीय पहलू या आपकी भावनाओं की तो कंपनी को कई कद्र ही नहीं है। अधिकतर कंपनियां नियम विरुद्ध कार्य कर इसी खेल में लोगों को बर्बाद कर स्वयं मालामाल हो रही है।यह हकीकत गत दिनों स्थायी लोक अदालत में आए ऐसे ही प्रकरणों में देखने को मिले। राशि जमा करवाने के बावजूद कंपनी ने रसीद में कांट-छांट कर का सोना उलझा दिया और दुगुनी कीमत का सोना ब्याज पेटे हजम कर लिया। कई प्रकरण में तो छोटी-छोटी कमियों निकालकर बिना जानकारी सोना नीलाम कर खाते क्लॉज कर दिए। ऐसे कुछ मामलोंं में अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा व सदस्यों ने कंपनियों पर विशेष हर्जाने के साथ ही परिवादियों को राहत दिलाई। एक प्रकरण में तो उन्होंने कंपनी के विरुद्ध नई दिल्ली स्थित आरबीआई तक को लिखा तथा परिवादी को कंपनी के विरुद्ध आपरािधक व सिविल केस दर्ज करवाने के लिए स्वतंत्र किया।


इन नियमों की पालना नहीं करती कंपनी

- गोल्ड लोन के मामलों में गिरवी रखे गए गोल्ड की नीलामी से पूर्व संबंधित ऋणी को लिखित नोटिस देकर ऋण राशि जमा कराने की चेतावनी देना अनिवार्य है।
- नीलामी की संपूर्ण प्रक्रिया ऋण इकरार में ही उल्लेखित की जानी चाहिए।

- नीलामी के समय व स्थान की सूचना दो दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित की जानी चाहिए।
- ऋणी को नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने का समुचित अवसर दिया जाना चाहिए।


अपनी माता, पत्नी या पुत्री के जेवर गिरवी रखकर धन की व्यवस्था करना किसी परिवार या व्यक्ति के लिए जीवन में निश्चित रूप से अत्यधिक मुश्किल समय होता है। किसी व्यक्ति की इस मजबूरी का नाजायज लाभ गोल्ड लोन देने वाले संस्थान नहीं उठा सके। इसके लिए रिजर्व बैंक ने समय-समय पर गाइड-लाइन जारी की है, परंतु यह देखा गया है कि ऋणदाता अपने निजी फायदे के लिए निर्धारित गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए जेवरात विक्रय नीलाम कर देते है। ऐसी स्थिति में पीडि़त व्यक्ति विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत न्यायालय की शरण ले सकता है।

सुशील कोठारी, वरिष्ठ अधिवक्ता

वर्तमान समय में गोल्ड लोन तत्काल बिना किसी दस्तावेज एवं औपचारिकता से आसनी से उपलब्ध होने वाला ऋण है। परंतु अपनी ज्वैलरी व सोने पर लोन लेते समय ऋण संबंधी दस्तावेजों को सावधानीपूर्वक देखना चाहिए। अन्यथा अपनी ज्वैलरी से वंचित होना पड़ सकता है। क्योंकि जितना आसान गोल्ड ऋण प्राप्त करना है उतना ही आसन बैंक के लिए गोल्ड बेचना भी है। मानवीय पहलू उनके लिए कोई मायने नहीं रखते है। अधिकतर ऐसे मामले न्यायालय में आ रहे है जिनमें मानवीय पहलू को पूर्णत: नजर अंदाज किया गया।


बृजेन्द्र सेठ, वरिष्ठ अधिवक्ता

Published on:
23 Aug 2019 07:54 pm