- तीन साल में 8 से बढकऱ 11 लाख हुए मरीज, मच्छरजनित अन्य लोगों में भी इजाफा
भगवती तेली/उदयपुर . विश्व स्वास्थ्य संगठन में दक्षिण एशिया क्षेत्र के सलाहकार डॉ. आरएस शर्मा ने कहा कि देश में 2013 से 2016 तक तीन लाख से ज्यादा मलेरिया रोगी बढ़े, लेकिन देश में मलेरिया को लेकर काम करने वाले कीट वैज्ञानिक आधे से भी कम रह गए हैं। 1977 में मलेरिया रोकथाम के लिए बनाए गए 72 जोन में आधे से ज्यादा में कीट वैज्ञानिक पद रिक्त हैं। इसी प्रकार राज्य कीट वैज्ञानिकों के 23 में से 15 पद खाली है। इसमें राजस्थान का एकमात्र पद भी शामिल है। मलेरिया रोकथाम के लिए राजस्थान के 5 में से दो जोन खाली है। मोबाइन यूनिट वैन भी नहीं है।
नेशनल सेन्टर फोर डिसीज कंट्रोल के पूर्व अतिरिक्त निदेशक रह चुके डॉ. शर्मा ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा कि प्रदेश की करीब छह करोड़ की जनता पर सिर्फ तीन कीट वैज्ञानिक काम कर हैं, जो नाकाफी है। हमें टेक्नीकल मेन पावर बढ़ाने की आवश्यकता है। हाल के वर्षों में चिकनगुनिया, डेंगू, जापानी बुखार, कालाजार, फायलेरिया आदि रोग भी बढ़ गए लेकिन इनकी रोकथाम के लिए अलग से कोई जोन नहीं बनाए गए और न ही पहले से मौजूद जोन में पद भरे गए। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2030 तक मलेरिया को देश से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए तीन फेज बनाए गए है। पहले फेज में एक एपीआई से कम वाले 15 राज्य, दूसरे फेज में दो एपीआई तक वाले ग्यारह व तीसरे में इससे ज्यादा वाले राज्यों को रखा गया है लेकिन इन राज्यों में कीट वैज्ञानिक ही नहीं है। ऐसे में मलेरिया सहित मच्छरजनित अन्य रोगों से रोकथाम मुश्किल है। डॉ. शर्मा सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के पब्लिक हैल्थ एंटोमोलॉजी के विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए उदयपुर ? आए थे। वे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम व इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च में विशेषज्ञ भी है।
देश में यूं बढ़े मलेरिया रोगी
वर्ष : मरीज : मृत्यु
2013 : 8 लाख 81 हजार 730 : 440
2014 : 11 लाख 2 हजार 205 : 562
2015 : 11 लाख 69 हजार 261 : 384
2016 : 10 लाख 90 हजार 724 : 331
अगस्त 2017 : 5 लाख 92 हजार 905 : 75
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प्रदेश में यह स्थिति
वर्ष : मरीज : मृत्यु
2013 : 33 हजार 139 : 15
2014 : 15 हजार 118 : 04
2015 : 11 हजार 796 : 03
2016 : 12 हजार 741 : 05
अगस्त 2017 : 3 हजार 97 : 0
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कहां कितने पद खाली
देश में आंध्रप्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड में कीट वैज्ञानिक के पद रिक्त हैं। 37 जोनल कीट वैज्ञानिकों के पद खाली है। बिहार, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ व उत्तराखंड जोन के सभी पद रिक्त हैं। आंध्रप्रदेश व कनार्टक के एक-एक, असम, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात व ओड़ीसा के दो-दो, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश में तीन पद रिक्त हैं। एनवीबीडीसीपी वेबसाइट के अनुसार सब सेन्टर पर देश में एक लाख 53 हजार 655 पदों की आवश्यकता है। इनमें से 93 हजार 2 पद स्वीकृत है। 37 हजार 888 पद रिक्त पड़े है। प्रदेश में 14 हजार 407 पदों की आवश्यकता हैं, 2 हजार 388 पद स्वीकृत व 546 पद रिक्त हैं।
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चिकित्सा विभाग व विवि में हो सामंजस्य
हम कीट को लेकर विशेष शोध किया जा रहा है। विभाग के शोधार्थी शहर व जिले में मच्छर के क्षेत्र के अनुसार मच्छर के प्रकार व क्षेत्र में रोग की संभावना पर काम करते है। अगर चिकित्सा विभाग व विवि मिलकर काम करे, तो रोगों को फैलने से रोका जा सकता है। एवं कीट वैज्ञानिकों की कमी की भरपाई भी की जा सकती है। पब्लिक हैल्थ एंटोमोलॉजी की विद्यार्थी क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
प्रो. आरती प्रसाद, प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष, सुविवि