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मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर, बदला एग्जाम सिस्टम, 6 महीने में कई नवाचार

Mohanlal Sukhadia University: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने छात्रों के लिए बड़ा बदलाव करते हुए एग्जाम सिस्टम में सुधार किए हैं। पिछले छह महीने में कई नवाचार लागू किए गए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और छात्र हितैषी बनी है।

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Mohanlal Sukhadia University changes exam system introduces multiple reforms in just six months

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (फोटो- पत्रिका)

Mohanlal Sukhadia University changes exam system: उदयपुर: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में इस बार परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां प्रश्नपत्र छोटे आकार (ए-8) के करीब 18 पन्नों में तैयार होते थे, वहीं अब नए टेंडर के बाद प्रश्नपत्र ए-4 साइज में तैयार किए जा रहे हैं।

बता दें कि पूरा पेपर चार पन्नों में ही सिमट गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव से न केवल परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई है। बल्कि प्रिंटिंग और पेपर के खर्च में भी कमी आने की संभावना है।

नई फर्म को मिला प्रिंटिंग का ठेका

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पुरानी फर्म का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई थी। इस टेंडर में पुरानी फर्म ने भी भाग लिया, लेकिन सबसे कम दर देने वाली नई फर्म को यह कार्य सौंपा। यह फर्म केवल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में भी प्रिंटिंग का काम कर रही है।

दो छोटी घटनाएं, जांच के आदेश

परीक्षाओं के दौरान अधिकांश जगहों पर प्रश्नपत्रों की व्यवस्था सुचारू रही, लेकिन विधि महाविद्यालय में दो छोटी तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं। एक प्रश्नपत्र में प्रिंटिंग थोड़ी हल्की मिली और एक लिफाफे में विधि के पेपर की जगह एमकॉम के कुछ प्रश्नपत्र रख दिए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए संबंधित फर्म को नोटिस जारी किया है। मामले की जांच के लिए सर्च कमेटी गठित की है, जो पूरी जांच के बाद लापरवाही पर फर्म पर पेनल्टी लगाने का निर्णय लेगी।

खर्च में बड़ी बचत की उम्मीद

प्रशासन का कहना है कि पहले प्रश्नपत्र 18 पन्नों तक तैयार होते थे, जिससे पेपर और प्रिंटिंग का खर्च अधिक आता था। अब प्रश्नपत्र चार पन्नों में तैयार होने से पेपर और प्रिंटिंग लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। विश्वविद्यालय में वर्ष में दो बार परीक्षाएं आयोजित होती हैं। ऐसे में पूरे साल के स्तर पर इससे ज्यादा की बचत का अनुमान है।

एनईपी के तहत पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए यह बदलाव किए हैं। सभी नियमों का पालन करते हुए परीक्षा प्रणाली को सरल और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

6 माह में कई नवाचार

1- मार्कशीट के साथ माइग्रेशन सर्टिफिकेट

अब तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को मार्कशीट के साथ ही माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है, जिससे उन्हें बार-बार विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

2- मूल माइग्रेशन सर्टिफिकेट जमा करने पर फीस नहीं

यदि कोई विद्यार्थी स्नातक के बाद इसी विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएशन या पीएचडी करना चाहता है और अपना माइग्रेशन सर्टिफिकेट विश्वविद्यालय में जमा कर देता है, तो उसे अलग से फीस नहीं देनी पड़ेगी। कोर्स पूरा होने के बाद वही माइग्रेशन सर्टिफिकेट वापस उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

3- घर बैठे मिल रहे दस्तावेज

अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर फीस जमा कर सकते हैं और डुप्लीकेट मार्कशीट सहित अन्य दस्तावेज भी प्राप्त कर सकते हैं। पहले इसके लिए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय आकर कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थीं।

नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई प्रशासनिक सुधार किए हैं। छह माह में छात्र हित से जुड़े कई बदलाव से उन्हें सीधा फायदा भी हुआ है।
-प्रो. बीपी सारस्वत, कुलपति सुविवि