
सलूंबर जिले के एक घर में सर्वे करती चिकित्सा विभाग की टीम। फोटो: पत्रिका
उदयपुर। सलूंबर जिले के घाटा व लालपुरा क्षेत्र में रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को दो और बच्चों की मौत हो गई, जिससे सात दिन में मृतकों का आंकड़ा सात पहुंच गया है। चिकित्सा विभाग ने दोनों बच्चों की मौत के कारणों का खुलासा नहीं किया, लेकिन एक बच्चे के परिजन ने उल्टी के बाद मौत की पुष्टि की है। एक बच्चा महज दो माह का है, इससे कारणों का पता नहीं चल पाया।
राज्य सरकार के निर्देश पर जयपुर और उदयपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमें गांवों में डेरा डालकर जांच कर रही है। टीमों ने घर-घर जाकर 429 परिवारों का सर्वे किया। इनमें 17 और नए बच्चे बीमार मिले। उन्हें हल्का बुखार के लक्षण थे। प्राथमिक जांच के बाद आठ बच्चों को भर्ती किया, इनमें पांच को उदयपुर बाल चिकित्सालय रेफर किया। दोनों ही गांवों जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग की टीमें डेरा डाले हैं, वहीं जलदाय विभाग की टीमों ने पूरे गांव में पानी के सैंपल लिए। पशु चिकित्सालय की टीमों ने भी सर्वे कर दवाओं को छिड़काव किया है।
प्रारंभिक जांच में बच्चों की मौत के कारणों का खुलासा नहीं हुआ। पूछताछ व जांच में सभी को उल्टी, ताण (दौरे), बेहोशी की लक्षण सामने आए। चिकित्सा विभाग ने एक मृतक व 18 अन्य बच्चों के ब्लड सेम्पल लेकर न्यूरो पैनल (दिमागी बुखार) की जांच करवाई, इनमें सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद मौतों का रहस्य और गहरा गया है। जांच टीम अब किसी दवा के साइड इफेक्ट, अन्य बीमारी या फूड पॉइजनिंग की आशंका पर भी जांच कर रही है। गौरतलब है कि इस बीमारी से 31 मार्च को लालपुरा निवासी दीपक मीणा (5) सीमा मीणा (3) तथा 5 अप्रेल को घाटा निवासी राहुल मीणा (4), काजल मीणा (5) व लालपुरा निवासी लक्ष्मण मीणा (7) की मौत हो गई थी। दीपक व लक्ष्मण दोनों सगे भाई थे।
सलूम्बर सीएमएचओ डॉ. महेन्द्र कुमार परमार ने बताया, मंगलवार सुबह साढे आठ बजे सलूम्बर जिला अस्पताल में आमलोदा (झल्लारा) निवासी रौनक (4.5) पुत्र जितेन्द्र वैद को परिजन मृत अवस्था में लेकर पहुंचे थे। परिजन ने बताया कि बच्चे को उल्टी हुई तो घर पर ही रखी सिरप दी। तबियत ज्यादा बिगड़ने पर वे सुबह अस्पताल लाए। परिजन बिना पोस्टमार्टम करवाए शव ले गए। इसी तरह लसाड़िया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर सुबह करीब 11 बजे कालीभीत निवासी बंशी (2 माह) पुत्री अर्जुन को मृत अवस्था में लेकर पहुंचे। परिजन ने बताया कि यहां लाने से पहले बच्ची का निजी अस्पताल में उपचार कराया था।
चिकित्सकों ने बताया कि काजल को तेज बुखार होने पर परिजन उसे 12 घंटे तक देवरे में लेकर बैठे रहे। दो बच्चे ऐसे भी थे, जिन्हें लसाड़िया चिकित्सालय ले जाने पर जब रेफर किया गया तो परिजन पहले धरियावद, प्रतापगढ़ में घूमाते रहे, फिर सलूम्बर ले जाने का विचार किया तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया। दो बच्चे उदयपुर रेफर हुए। इनमें एक बच्चे को परिजन वापस ले गए जबकि एक ने यहां उपचार के दौरान दम तोड़ा।
लसाड़िया मुख्यालय से करीब 17 किमी दूर बसे 550 की आबादी वाले इन पहाड़ी गांवों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सरकारी गाड़ियां और अधिकारी पहुंचे हैं।
यहां छोटी छितराई पहाड़ी क्षेत्र होने से गांवों के हालात ऐसे हैं कि बीमार को खाट या कंधों पर उठाकर ऊबड़—खाबड़ रास्तों से सडक़ तक लाना पड़ता है। इन गांवों में मोबाइल नेटवर्क भी मुश्किल है।
किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आमजन से अपील है कि बच्चों में किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
-मुहम्मद जुनैद, जिला कलक्टर, सलूम्बर
Updated on:
08 Apr 2026 10:35 am
Published on:
08 Apr 2026 10:01 am
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