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पाइपलाइन के बिना कैसे होंगे 2 माह में 10 हजार नए कनेक्शन

पीएनजी गैस योजना की रफ्तार धीमी, शहर में अभी सिर्फ 4 हजार उपभोक्ता- ज्यादातर सरकारी संस्थान और आवास अब भी गैस लाइन से दूर उदयपुर. शहर में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के विस्तार को लेकर प्रशासन ने सरकारी संस्थानों में गैस कनेक्शन देने की पहल तो शुरू कर दी है, लेकिन असल में इस योजना […]

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मिड डे मील योजना के तहत संचालित विद्यालयों और टीएडी छात्रावासों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है, लेकिन शहर के अधिकांश इलाकों में अब तक पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई है।

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पीएनजी गैस योजना की रफ्तार धीमी, शहर में अभी सिर्फ 4 हजार उपभोक्ता- ज्यादातर सरकारी संस्थान और आवास अब भी गैस लाइन से दूर

उदयपुर. शहर में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के विस्तार को लेकर प्रशासन ने सरकारी संस्थानों में गैस कनेक्शन देने की पहल तो शुरू कर दी है, लेकिन असल में इस योजना की रफ्तार काफी धीमी है।जिला प्रशासन की योजना के तहत राजकीय आवास, विद्यालय, छात्रावास, कॉलेज, सर्किट हाउस, प्रशिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालय परिसरों की रसोइयों को पीएनजी गैस कनेक्शन से जोड़ने की तैयारी है। साथ ही मिड डे मील योजना के तहत संचालित विद्यालयों और टीएडी छात्रावासों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है, लेकिन शहर के अधिकांश इलाकों में अब तक पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई है।

शहर का एक चौथाई हिस्सा ही कवर

जानकारी के अनुसार गैस कंपनी अब तक शहर के करीब एक चौथाई हिस्से में ही पाइपलाइन डाल पाई है। फिलहाल प्रतापनगर, शोभागपुरा और नवरत्न कॉम्पलेक्स क्षेत्र में ही पाइपलाइन डाली गई है। जबकि हिरणमगरी सहित कई बड़े आवासीय क्षेत्रों में अभी पाइपलाइन का काम अधूरा है। इन्हीं इलाकों में सरकारी आवास, विद्यालय और छात्रावास भी बड़ी संख्या में स्थित हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जहां गैस लाइन ही नहीं पहुंची, वहां पीएनजी कनेक्शन देने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा।

10 के मुकाबले अब तक केवल 4 हजार

जिला प्रशासन ने संबंधित कंपनी को दो माह के भीतर 10 हजार नए पीएनजी कनेक्शन देने का लक्ष्य दिया है।लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि पूरे उदयपुर शहर में अब तक करीब 4 हजार कनेक्शन ही दिए जा सके हैं।

कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जहां पाइपलाइन डाली जा चुकी है, वहां जागरूकता अभियान और सर्वे के जरिए लोगों को कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।--

ये हैं पिछड़ने के कारण

पहाड़ी इलाकों में काम मुश्किल

शहर की भाैगोलिक िस्थति इस योजना के सामने चुनौती बना हुआ है। कई इलाकों में पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पाइपलाइन बिछाने में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। कई जगहों पर चट्टानों की कटिंग करनी पड़ रही है, इससे काम की गति धीमी हो रहा है।जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह

जिन इलाकों में पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां भी कई लोगों ने अभी तक पीएनजी कनेक्शन नहीं लिया है।गैस कंपनियों का कहना है कि लोगों में जागरूकता की कमी के कारण कनेक्शन लेने में रुचि कम दिखाई दे रही है।

एलपीजी का मजबूत नेटवर्क भी वजह

शहर में पहले से एलपीजी गैस का मजबूत नेटवर्क मौजूद है। शहर में इंडेन, एचपी और भारत गैस की कई एजेंसियां घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति कर रही हैं। भारत गैस की अकेले करीब 18 एजेंसियां जिले में कार्यरत हैं। ऐसे में अधिकांश परिवार अभी भी सिलेंडर गैस पर निर्भर हैं, इसके कारण पीएनजी की ओर बदलाव धीमी गति से हो रहा है।पाइपलाइन का सीमित नेटवर्क

शहर के बड़े हिस्से में अब तक गैस पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। फिलहाल कुछ क्षेत्रों में ही लाइन डाली गई है। हिरणमगरी जैसे क्षेत्रों में पीएनजी की मांग ज्यादा है, लेकिन वहां अभी पाइपलाइन का काम पूरी तरह नहीं हुआ है।

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