पन्नाधाय महिला चिकित्सालय का मामला
उदयपुर . स्टाफ की खींचतान ने संभाग के सबसे बड़े पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय में ‘जननी सुरक्षा योजना’ की उपादेयता पर सवालिया निशान लगा दिया है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना के प्रति बरती जा रही कोताही प्रसूताओं के लिए नई मुसीबत बन रही है। केंद्र सरकार के निर्देशों को दरकिनार कर जिम्मेदारी के प्रति बरती जा रही ढिलाई से महीनों बाद भी कई प्रसूताओं के खातों में योजना राशि जमा नहीं हो रही है।
योजना राशि के भुगतान की जिम्मेदारी चिकित्सालय उप अधीक्षक के हस्ते है, लेकिन इतने बड़े चिकित्सालय में योजना से जुड़े आवेदन एवं आवश्यक दस्तावेज को जुटाने के लिए कर्मचारी नहीं है। वर्तमान में एक कम्प्यूटर ऑपरेटर को यह जिम्मेदारी दी हुई है। अब विवाद इस बात का है कि लेखाशाखा एवं कार्यालय अधीक्षक ने संविदा पर सेवारत ऑपरेटर को इसके एवज में भुगतान करने से मना करते हुए उससे मूल कार्य कराने की हिदायत दे दी है। ऐसे में एक बार फिर आवेदनों को जमा करने का संकट खड़ा हो गया है। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बाद जननी सुरक्षा योजना के लेकर बरती जा रही है।
2564 आवेदन, भुगतान नहीं
ताजा रिपोर्ट के अनुसार हॉस्पिटल से जयपुर को ऑनलाइन भेजे गए करीब 2564 आवेदनों का भुगतान प्रसूताओं के खातों में नहीं पहुंचा है। इनमें से 661 आवेदनों को तकनीकी खामियों के कारण रिजेक्ट करना सामने आया है। इससे पहले और बाद में भी प्रसूताओं के अपूर्ण आवेदनों को लेकर भुगतान अटकने की जानकारी है। हालांकि अधिकारी खामियों को दूर कर भुगतान दिलाने के दावे कर रहे हैं। लेकिन हकीकत कुछ और हैैै।।
जनाना हॉस्पिटल का सच
माह (2017) ओपीडी आईपीडी
जनवरी - 12003 - 2613
फरवरी -11838- 2309
मार्च - 12483 - 2529
अप्रेल - 11717 - 2485
मई - 13940 - 2841
जून - 13218- 2697
जुलाई- 14088 - 3026
अगस्त- 13444- 3720