
Bhajan singer Dhanraj Joshi (Patrika Photo)
भटेवर (उदयपुर): चलते रहेंगे यह काफिले हमारे बगैर भी, एक तारा टूटने से आसमान सूना नहीं होता…जीवन की नश्वरता पर लिखी इन पंक्तियों को अपनी अंतिम भजन संध्या में गाने वाले निर्गुणी भजनों के बेताज बादशाह धनराज जोशी (56) की आवाज हमेशा के लिए मौन हो गई।
बता दें कि उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाइवे पर वातडा होटल के पास शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। दोपहर करीब 1:30 बजे जैसे ही जोशी की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव बड़वाई पहुंची, पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
संगीत जगत के जगदीश वैष्णव मुगाणा, लेहरुदास तासोल, मधुबाला राव उदयपुर, नरेश प्रजापत, गायक जगदीश वैष्णव मुंगाना, लेहरु दास तासोल, नरेश प्रजापत भीलवाड़ा, चैनसुख जागीड़, प्रेम शंकर जाट भीलवाड़ा, नारायण लाल सेन सावा, लक्ष्मण सिंह गढवी, फतेहलाल माराज हिंता, भैरूलाल भाट, अर्जुन राणा रामनगर आसींद, राधेश्याम वैष्णव काबरा, मधुबाला राव उदयपुर, नारायण लाल लोहार कपासन सहित दर्जनों कलाकार अपने साथी को अंतिम विदाई देने पहुंचे। उनके पुत्रों, गणपत और सोनू ने मुखाग्नि दी।
हैरानी की बात यह रही कि निधन से महज चार घंटे पहले हल्दीघाटी के मंच पर उन्होंने उठो मुसाफिर बिस्तर छोड़ो गाड़ी आने वाली है…होसीयार रेणा रे नगर में चोर आवेला…जैसे भजनों के जरिए आध्यात्मिक संदेश दिया था। श्रोताओं के बीच यह चर्चा का विषय रहा कि मानो उन्हें अपनी जीवन यात्रा के पूर्ण होने का आभास हो गया था।
सहकारिता मंत्री गौतम दक, चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, पूर्व विधायक रणधीर सिंह भीडर, प्रीति कुवर शक्तावत ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने अपने संदेश में कहा कि धनराज जोशी ने निर्गुणी भजनों को सात समंदर पार तक पहुंचाया और उनके जाने से मेवाड़ के सांस्कृतिक गौरव का एक स्तंभ ढह गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़वाई निवासी धनराज जोशी हल्दीघाटी के पास एक भजन संध्या कार्यक्रम में प्रस्तुति देकर घर लौट रहे थे। माना जा रहा है कि चालक को नींद की झपकी आने के कारण गाड़ी अनियंत्रित हो गई, इससे यह भीषण हादसा हुआ। सूचना मिलते ही हाइवे एंबुलेंस ने उन्हें डबोक चिकित्सालय पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डबोक थाना पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
धनराज जोशी केवल मेवाड़ ही नहीं, बल्कि मारवाड़ और पूरे राजस्थान में अपनी अनूठी भजन गायकी और कॉमेडी शैली के लिए प्रसिद्ध थे। उनके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंस्टाग्राम पर उनके 3.79 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उन्होंने अपनी गायकी से जनता के दिलों में एक खास जगह बनाई थी।
धनराज जोशी का जन्म एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ था। उनकी मां भोली बाई, नाना-नानी और बहनें भी भजन गायन से जुड़ी रही हैं। महज 8वीं तक शिक्षित धनराज ने पहली बार पहली कक्षा में स्कूल के स्टेज पर प्रस्तुति दी थी। चार बहनों में वे इकलौते भाई थे। उनके परिवार में अब पत्नी के अलावा दो बेटे गणपत-सोनू और एक बेटी किरण हैं।
Published on:
02 May 2026 09:09 am
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